छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन को छत्तीसगढ़ की खोज अंतर्गत पुनर्प्रकाशित “महाकौसल इतिहास शोध पत्रिका छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मण्डली महाकोशल इतिहास परिषद् संस्थापक पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय सन् 1920 की प्रथम खण्ड 1933 की प्रथम प्रति लोकार्पित की गई। आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, सचिव ने संस्था
एवं छत्तीसगढ़ गौरव, यहाँ के गढ़ों सामाजिक आर्थिक, राष्ट्रीय चेतना के विषय एवं विभूतियों के व्यक्तित्व के अन्वेषण की जानकारियाँ दी धार्मिक, ऐतिहासिक पर्यटकीय नवान्वेषण से अवगत कराया स्वामी विवेकानंद के रायपुर निवास स्थल (डे भवन, बुढ़ापारा, कौशल्या माता मंदिर एवं चंद्रखुरी के पुरावशेषों, रामवनगमन पथ विषयक जानकारियों पर विचार विमर्श हुआ। माननीय ने संस्था को निरंतर कार्य करने की प्रेरणा दी एवं शुभकामनाएं दी। सह-सचिव शुभम दिव्य एवं अन्य अधिकारी वृंद उपस्थित थे।
ज्ञातव्य है कि देश की एक प्राचीन संस्था रही हैं महाकोसल इतिहास परिषद् और उनके द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका भी यहाँ के मध्यांचल की एक प्रथम पत्रिका रही हैं। अंग्रेजी राज में प्रकाशित 2वर्ष की पुस्तकों हिन्दी अनुवाद, 1854-58 के पत्रों का अनुवाद परक पुस्तकें जो डॉ.प्रभुलाल मिश्र एवं रमेन्द्रनाथ मिश्र द्वारा की गई है की प्रतियाँ और छत्तीसगढ़ी की एक पुस्तक इतिहास विषयक तोर, मोर, हमर रइपुर की प्रति भेंट की गई । छत्तीसगढ़ के गौरव की व्यापक चर्चा हुई। नवान्वेषण से छत्तीसगढ़ की एक पहचान बनी हैं।








