Raipur
महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज समता कॉलोनी रायपुर में ”विकसित भारत में शिक्षा का महत्व” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar) का Hybrid Mode आयोजन किया। यह सेमिनार कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया जिसमे शिक्षकगण, शोधकर्ता और छात्र शामिल हुए। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य भारत के विकास के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श और विचारों का आदान-प्रदान करना था।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूम में माननीय श्री सच्चिदानंद शुक्ला कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वद्यिालय, रायपुर (छ.ग.) एवं प्रथम मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. प्रसाद कोला एमिटी यूनिवर्सिटी के निदेशक एवं द्वितीय सत्र मेु मुख्य वक्ता के रूप मे डॉ. राजीव चौधरी डीएसडब्ल्यू एवं शारीरिक शिक्षा, एसओएस, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर थे।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में महाविद्यालय के चेयरमैन आदरणीय श्री राजेश अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. एम.एस. मिश्रा, एडमिस्टेªटर सुश्री शिवांगी मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहें।
सेमिनार का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एम.एस. मिश्रा के स्वागत भाषण के साथ प्रारंभ हुआ। उन्होने प्रतिभागियों का स्वागत किया और ”विकसित भारत में शिक्षा का महत्व” की परिकल्पना पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके बाद कॉलेज के चेयरमैन श्री राजेश अग्रवाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा देशहित के लिये प्रेरित किया तथा विद्यार्थीयों मे गुरूकूल परंपरा को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि श्री सच्चिदानंद शुक्ला ने भारत के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. प्रसाद कोला ने शिक्षा प्रणाली में सुधार, गुणवत्ता व तकनीकी शिक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. राजीव चौधरी जी ने शरीर,मन, आत्मा के कार्य उसके महत्व पर उद्देश्यपूर्वक व्याख्यान प्रस्तुत किए।
महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज समता कॉलोनी रायपुर में ”विकसित भारत में शिक्षा का महत्व में विषय” पर आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar) सफल रहा। भारत के विकास के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया, बल्कि युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रेरित किया। इस सेमिनार ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि शिक्षा और विचार-विमर्श के माध्यम से ही हम एक समृद्ध और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के दोनेा सत्र ऑफलाईन एवं ऑनलाईन मोड पर आयोजित किया गया था। जिसमें 150 से भी ज्यादा प्रतिभागी जुडे थें।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण तथा अन्य महाविद्यालय से आये प्रतिभागी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ. श्वेता तिवारी के द्वारा किया गया।








