रायपुर। श्रीमती शकुन डहरिया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। श्रीमती डहरिया ने कहा है कि महात्मा गांधी ने मातृभूमि की सेवा के लिए सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनके आदर्श एवं विचार देश सहित पूरी दुनिया के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। हमें उनके आदर्शों को अपने व्यवहार एवं आचरण में उतारने की जरूरत है। ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो, ऐसे सीखो की तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो। मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है, सत्य मेरा भगवान है और अहिंसा उसे पाने का साधन, खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। नारी को अबला कहना अपमानजनक है। यह पुरुषों का नारी के प्रति अन्याय है। दुनिया में ऐसे लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता सिवाए रोटी के रूप में अहिंसा सबसे बड़ा कर्तव्य है। जहां तक संभव हो हिंसा से दूर रहकर मानवता का पालन करना चाहिए। व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं बल्कि उसके चरित्र से की जाती है. एक सभ्य घर के बराबर कोई विद्यालय नहीं है और एक अच्छे अभिभावक जैसा कोई शिक्षक नहीं है। उस आजादी का कोई फायदा नहीं है जिसमें गलतियां करने की आजादी न हो, जो लोग अपनी तारीफ के भूखे होते हैं वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है। काम की अधिकता नहीं बल्कि अनियमितता व्यक्ति को मार डालती हैं। भूल करने में पाप तो है ही परन्तु उसे छुपाना उससे भी बड़ा पाप हैं। चरित्र की शुद्धि ही ज्ञान पाने का उद्देश्य होना चाहिए।









