PWD पुलिया जर्जर हालत में, कभी भी हो सकती हैँ अनहोनी घटना,
नए पुल का हो निर्माण, पुराने पुल को आम जन के आवागमन के लिए छोड़ा जाये
एस एच अज़हर औ
किरंदुल / वार्ड नंबर 18 में बना पिडब्लूड़ी का पुल काफ़ी पुराना हो चूका हैँ और लगातार ओवरलोड हाइवा का आना जाना इसी पुल से होता हैँ जिसके कारण पुल कि हालत खस्ता हैँ और कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती हैँ, ज्ञात हो कि एनमडीसी का बड़ा स्लाइम्स का डेम और amns का टैलिंग डेम कड़मपाल में स्थित हैँ और वहाँ से रोजाना हज़ारो टन अयस्क को निकालकर बड़े बड़े टिप्परों से एनमडीसी के एमवी साइडिंग और amns के प्लांट में ले जाया जाता हैँ, इस परिवहन कार्य के लिए यही एकमात्र रास्ता हैँ जिसके मध्य में पिडब्लूड़ी का ब्रिज आता हैँ, सालों पहले जब इस पुल का निर्माण हुआ था तब बड़ी गाड़ियों का चलन नहीं था और 9 टन केपासिटी कि गाड़ियों से परिवहन कार्य किया जाता था, दूसरी बात उस वक्त ऐसआर और amns अस्तित्व में ही नहीं आये थे सिर्फ आमजन के आवागमन के हिसाब से पुल का निर्माण किया गाया था,
परन्तु आज हालात बदले हुवे हैँ, वर्तमान में 10 चक्क और 12 चक्का वाहनों से कड़मपाल से प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार मेट्रिक टन अयस्क का परिवहन किया जाता हैँ, और इसी खस्ताहाल पुल से होकर प्रत्येक वाहन को गुज़रना होता हैँ
प्रत्येक वाहन कि भार क्षमता 20 से 25 टन हैँ मगर प्रत्येक वाहन में 40 से 50 टन अयस्क भरकर परिवहन किया जाता हैँ और इसी ओवर लोडिंग के कारण इस पुल कि हालत बिगड गयी हैँ।
ज्ञात हो कि परिवहन ठेकदारों द्वारा किया जाता हैँ, ठेकदारों को कम दर पे परिवहन कि निविदा दी जाती है AMNS और एनमडीसी के द्वारा जिस कारण ठेकेदार मज़बूरी वश अपने वाहनों में ओवरलोड अयस्क ले जाकर होने वाले नुकसान कि भरपाई करता हैँ, अब ठेकदार के नुकसान कि भरपाई हो पाति है या नहीं ये तो नहीं मालूम मगर पुरे मार्ग का ज़बरदस्त नुकसान हो रहा हैँ, जिसमें ये पुल भी शामिल हैँ।






![]()


उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने कहा कि AMNS और एनमडीसी को संज्ञान लेने कि ज़रूरत हैँ तत्काल प्रभाव से ओवर लोडिंग को बंद करवाना चाहिए जिससे कि भविष्य में होने वाली किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके,
बड़ी बात ये हैँ कि लगभग 40 50 सालों से इसी मार्ग से अयस्क कि धुलाई कि जाती हैँ मगर आजतक इस मार्ग को पक्का नहीं किया गया, इस मार्ग के आसपास आदिवासियों के कई गांव हैँ जहाँ के रहवासी इसी मार्ग से आना जाना करते हैँ और आये दिन दुर्घटना का शिकार होते हैँ, बारह मास ये मार्ग कीचड और पानी युक्त गद्दो से लबा लब रहता हैँ, सालों से परिवहन का कार्य इस मार्ग से चल रहा और सालों तक चलना भी हैँ तो दोनों प्रोजेक्ट द्वारा अयस्क परिवहन हेतु कोई स्थाई व्यवस्था क्यों नहीं की जाती ये बड़ा प्रश्न हैँ,
उपाध्यक्ष ने मांग कि हैँ कि पिडब्लूड़ी पुल के समाननंतर एक नया पुल बनाया जाये और इस पुल को आमजन के लिए छोड़ा जाये क्युकी ये पुल ही किरंदुल को पलनार, नकुलनार, सुकमा होते हुवे आंध्रा और तेलंगाना के हैदराबाद से जोड़ता हैँ और प्रतिदिन सरकारी कर्मचारियों शिक्षकों, पंचायत कर्मियों एवं ग्रामीणों हजारों कि संख्या में आना जाना रहता हैँ।
