एस एच अज़हर दंतेवाड़ा, : छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) पहल से प्रभावित होकर 65 लाख रुपये के 27 ईनामी सहित कुल 37 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनका आत्मसमर्पण डीआरजी कार्यालय में डीआईजी कमलोचन कश्यप, सीआरपीएफ डीआईजी राकेश चौधरी, एसपी गौरव राय समेत अन्य अधिकारियों के समक्ष हुआ।
आत्मसमर्पितों में 4 महिलाएं 8 लाख ईनामी (कुमली उर्फ अनिता, गीता उर्फ लख्मी, रंजन उर्फ सोमा, भीमा उर्फ जहाज) शामिल हैं। ये विभिन्न कंपनियों, प्लाटून और एरिया कमेटियों से जुड़े थे। इनमें से कई 2024 के गोबेल-थुलथुली मुठभेड़, 2019-2020 की फायरिंग व लूट घटनाओं में शामिल रहे।
पुनर्वास लाभ: सभी को 50 हजार रुपये तत्काल सहायता, स्किल ट्रेनिंग, कृषि भूमि आदि मिलेंगे। डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, सीआरपीएफ की 111वीं, 230वीं व 80वीं वाहिनियों का विशेष योगदान।
बड़ी उपलब्धि: पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 165 ईनामी सहित 508+ माओवादी आत्मसमर्पित। ‘लोन वर्राटू’ अभियान तहत 333 ईनामी सहित 1160 (916 पुरुष, 244 महिलाएं) मुख्यधारा में शामिल।
आईजी सुंदरराज पी. ने कहा, “पूना मारगेम बस्तर में स्थायी शांति व प्रगति की दिशा में परिवर्तनकारी कदम है।” पुलिस-प्रशासन माओवादियों से हिंसा छोड़ शांति अपनाने की अपील कर रहा है।








