*गोबर से ऊर्जा, गाय-बैल से समृद्धि, ग्राम से विकास और उद्योग से आत्मनिर्भर भारत – संजय चौबे*
दुर्ग: *स्वावलंबी भारत अभियान के छत्तीसगढ़ प्रांत सह समन्वयक, छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष (उद्योग चेंबर), लघु उद्योग भारती के पूर्व अध्यक्ष तथा कैट के प्रदेश सलाहकार संजय चौबे ने बताया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उद्योगों को LPG गैस का स्वदेशी विकल्प तैयार करने की दिशा में तत्काल कार्य प्रारंभ करना चाहिए।*







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संजय चौबे ने बताया कि उद्योगों को अब इंडस्ट्रियल गोबर गैस (बायोगैस) प्लांट स्थापित करने की दिशा में योजना बनानी चाहिए। यह केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्वावलंबन, लागत नियंत्रण एवं ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
संजय चौबे ने बताया कि प्रदेश के फेब्रिकेशन एवं औद्योगिक इकाइयों में ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ LPG गैस का उपयोग कटिंग, हीटिंग एवं अन्य प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर होता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, अमेरिका एवं इजरायल के बीच तनावपूर्ण स्थिति के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उद्योगों पर दिखाई दे रहा है।
संजय चौबे ने बताया कि यह समय “आपदा को अवसर में बदलने” का है और उद्योगों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए।
इंडस्ट्रियल गोबर गैस प्लांट कैसे लगाया जा सकता है
संजय चौबे ने बताया कि इंडस्ट्रियल गोबर गैस प्लांट स्थापित करने के लिए उद्योगों को सबसे पहले अपनी दैनिक LPG खपत का आकलन करना चाहिए। इसके बाद आसपास उपलब्ध गोबर, डेयरी वेस्ट, किचन वेस्ट एवं जैविक अपशिष्ट का सर्वे कर प्लांट की क्षमता तय करनी चाहिए।
संजय चौबे ने बताया कि सामान्यतः 1 m³ बायोगैस उत्पादन के लिए लगभग 25 किलोग्राम गोबर की आवश्यकता होती है। इस आधार पर 100 m³ प्रतिदिन गैस उत्पादन के लिए लगभग 2.5 टन गोबर प्रतिदिन की आवश्यकता होगी।
संजय चौबे ने बताया कि प्लांट स्थापित करते समय भूमि, पानी, गैस स्टोरेज, पाइपिंग, सुरक्षा उपकरण एवं गैस उपयोग प्रणाली (बर्नर/हीटिंग सिस्टम) का समुचित प्रावधान करना आवश्यक है।
लागत एवं व्यवहार्यता (Viability)
संजय चौबे ने बताया कि इंडस्ट्रियल गोबर गैस प्लांट की लागत उसकी क्षमता एवं तकनीक पर निर्भर करती है। सामान्यतः छोटे से मध्यम स्तर के प्लांट ₹10 लाख से ₹60 लाख के बीच स्थापित किए जा सकते हैं, जबकि बड़े एवं उन्नत प्लांट की लागत अधिक हो सकती है।
संजय चौबे ने बताया कि यदि उद्योग अपने आसपास से गोबर एवं जैविक अपशिष्ट की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित कर लें, तो यह परियोजना आर्थिक रूप से व्यवहार्य सिद्ध हो सकती है।
LPG बनाम गोबर गैस – कौन अधिक किफायती
संजय चौबे ने बताया कि 1 m³ बायोगैस लगभग 0.42 किलोग्राम LPG के बराबर ऊर्जा प्रदान करती है। इस आधार पर 100 m³ बायोगैस प्रतिदिन लगभग 42 किलोग्राम LPG के बराबर ऊर्जा उपलब्ध कर सकती है।
संजय चौबे ने बताया कि वर्तमान में commercial LPG की लागत अधिक होने के कारण, यदि गोबर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, तो बायोगैस का उपयोग लंबे समय में अधिक किफायती एवं स्थिर विकल्प सिद्ध हो सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
संजय चौबे ने बताया कि इंडस्ट्रियल गोबर गैस प्लांट स्थापित करने से न केवल उद्योगों को लाभ मिलेगा, बल्कि इससे गांव-गांव में गो-धन का संरक्षण, पशुपालन को बढ़ावा एवं किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी।
संजय चौबे ने बताया कि यह मॉडल उद्योगों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच एक मजबूत आर्थिक एवं ऊर्जा समन्वय स्थापित करेगा, जिससे स्वावलंबी भारत की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
*संजय चौबे ने बताया कि उद्योगों को चाहिए कि वे इस दिशा में शीघ्र पहल करें, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का आकलन करें एवं चरणबद्ध तरीके से इंडस्ट्रियल बायोगैस प्लांट स्थापना की योजना बनाएं, जिससे भविष्य के ऊर्जा संकट से बचा जा सके और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके*।
