रायपुर।
आरंग क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और भंडारण के खिलाफ सेंट्रल माइनिंग टीम ने मंगलवार (05 मई 2026) को बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। चिखली, कुरूद, हरदीडीह और समोदा सहित कई प्रमुख स्थानों पर की गई इस औचक दबिश से रेत माफियाओं के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।इस कार्रवाई के दौरान अवैध खनन में लिप्त 12 चेन माउंटेन मशीनों (एक्सकेवेटर) को मौके पर ही सील कर दिया गया है। जांच टीम ने पाया कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बहुत बड़ा अंतर है और निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक रेत का भंडारण किया गया था। इसके साथ ही, रेत के इस अवैध भंडारण और खनन के कारण महानदी को कृत्रिम रूप से मोड़ने की कोशिश के संकेत भी मिले हैं, जहां नदी के कई किलोमीटर के हिस्से में हजारों घन मीटर रेत का अवैध स्टॉक नज़र आ रहा है। नियम तोड़ने वाले ठेकेदारों और स्टॉक संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी प्रशासनिक जद्दोजहद रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने इस अवैध कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन को लगातार शिकायतें सौंपी थीं।पहले भी जिला प्रशासन ने 6 चेन माउंटेन मशीनों को सील किया था। लेकिन प्रशासन की कार्रवाई के मात्र दूसरे दिन बाद ही माफियाओं ने फिर से भारी मशीनों के जरिए रात के समय (शाम 6 बजे के बाद) पूरी रात अवैध खनन शुरू कर दिया था। स्थानीय स्तर पर हो रही इस अनदेखी के बाद, मामले को राज्य के आला अधिकारियों और सेंट्रल माइनिंग टीम के संज्ञान में लाया गया, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है।टीम ने स्पष्ट किया है कि खदान संचालन और रेत भंडारण में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।वहीं, शिकायतकर्ता परमानंद जांगड़े ने प्रशासन से एक नई और महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने कहा कि जप्त किए गए अवैध स्टॉक का सही आकलन कर इसकी नीलामी की जानी चाहिए, जिससे आम जनता को सुगम और उचित दर पर रेत उपलब्ध हो सके।यह कार्रवाई क्षेत्र में अवैध कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश है और प्रशासन ने रेत माफियाओं पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।







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