बलौदा बाजार। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भाटापारा विधायक इंद्र साव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा नैतिकता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और मजबूरी का परिणाम है।
इन्द्र साव ने कहा कि यदि भाजपा और धर्मेन्द्र प्रधान में नैतिकता होती, तो मार्च में ही नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद तत्काल इस्तीफा दे दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को दबाने और युवाओं के अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया। लेकिन जब देशभर में छात्रों और युवाओं का आक्रोश बढ़ा और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे, तब मजबूरी में यह इस्तीफा सामने आया।
विधायक साव ने कहा कि वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि केंद्र की मोदी सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न शहरों तक छात्र-युवा सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं, जो सरकार के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का स्पष्ट संकेत है।







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उन्होंने प्रधानमंत्री से भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद से इस्तीफा देने की मांग की। साव ने कहा कि देश के युवाओं में किसी सरकार के खिलाफ इस तरह का आक्रोश पहली बार देखने को मिल रहा है।
इन्द्र साव ने पेपर लीक की घटनाओं को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताते हुए कहा कि यह अब “राष्ट्रीय महामारी” का रूप ले चुकी है। उनके अनुसार, केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से अब तक 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। बावजूद इसके, अब तक किसी भी दोषी को सजा नहीं मिलना चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी कहा कि लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं और प्रतिदिन लंबे समय तक पढ़ाई कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इस दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, जबकि अन्य अवसर उनके लिए सीमित हो जाते हैं। इसके बावजूद बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके।
