दांतेवाड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता व सर्व मूल समाज के प्रवक्ता संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में 41 विधायक 5 सांसद आरक्षित सीटों से सर्व मूल समाज के जनता द्वारा चुने जाते हैं। उसके बावजूद भी पेसा कानून लागू व पालन ना होना सर्व मूल समाज के जनता को अपने संवैधानिक हक अधिकर ना मिल पाना इसे देख समाज के जनता के मन में एक सवाल उठता है कि आरक्षित सीटों से जिन जन प्रतिनिधियों को चुनकर जनता ने संवेधानिक पदों पर भेज रही है क्या वे अपने ही समाज को हक अधिकार दिलवाने के लिए इच्छा शक्ति जुटा नहीं पा रहे हैं क्या इसी का नतीजा है। आज जो सर्व मूल समाज के जनता अपने मूल हक अधिकार से दिन बा दिन वंचित है और भुगतना पढ़ रहा है। अपने मूल हकअधिकारों को बचाने व पाने के लिए धरना रैली करना पढ़ रहा हैं दर-दर के ठोकरें खाने पड़ रहे हैं।
आरक्षित सीटों से सर्व मूल जनता के द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों नेताओं को क्या गंभीरता पूर्वक सोचने , समझने जानने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।




कौन सी कारण है, क्या मजबूरी है स्वयं के समाज को हक अधिकार व न्याय प्राप्त नहीं दिला पा रहे है
संजय पंत ने कहा कि ऐसा कौन से कारण है ,क्या मजबूरी है जो मूल समाज से ही राजनीतिक पार्टियों में जनप्रतिनिधि नेता मंत्री है और स्वयं के अपने ही मूल समाज को हीअपने मूल हक अधिकार व न्याय प्राप्त नहीं दिला पा रहे है । हर समाज के लोगों को सोचने में मजबूर कर देता है। की आखिर किन के दबाव में हैं जो सर्व मूल समाज के जनता को अपने मूल हक अधिकार व न्याय प्राप्त करवाने के लिए इच्छा शक्ति जुटा नहीं पा रहे हैं।समाज के जनता चुने हुए जनप्रतिनिधि नेता मंत्री स्वयं के समाज को बचा नहीं पा रहे हैं और स्वयं के समाज के जल जंगल जमीन खनिजों को रक्षित सुरक्षित नहीं कर पा रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं 41 आरक्षित विधायक सीट 5 आरक्षित सांसद सीट सामान्य सीट घोषित होने में।
समाज के जो लोग जनपद सदस्य अध्यक्ष जिला सदस्य अध्यक्ष विधायक सांसद मूल समाज जनता के द्वारा चुने जा रहे हैं वे लोग वार्ड में पंच पार्षद बनने के लायक भी रह पाएंगे या नहीं।
