रायपुर । हसदेव अरण्य को बचाने और परसा खदान के विरोध में हरिहरपुर गांव में चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन का आज 78वां दिन है। राज्य, देश और दुनिया से जहां लगातार हसदेव अरण्य को बचाने की आवाज़ें प्रतिदिन उठ रही है। वहीं लगातार हरिहरपुर के प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन को अपना समर्थन देने विभिन्न आंदोलनों, राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों से लोग पहुंच रहे है। हरिहरपुर प्रदर्शन स्थल से लगातार एक स्वर में था आवाज़ बुलंद हो रही है कि इन वनों की कीमत पर हमे बिजली नही चाहिए। इन वनों को काट कर जिस विकास की परिकल्पना की जा रही है वह अवास्तविक है।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के आंदोलन से जुड़े छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान मंच के उदयभान सिंह ने कहा कि आप जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संकल्पित है।और आज आप की लड़ाई सिर्फ छत्तीसगढ़ नही बल्कि विश्वव्यापी हो चुकी है। प्रदेश के किसी भी आंदोलन को आज तक इतना समर्थन नहीं मिला जितना हसदेव को मिला है।
पूर्व विधायक वीरेंद्र पांडे ने कहा कि गांधी जी कहते थे कि हमारी धरती जरूरत को पूरा कर सकती है लेकिन लूट और लालच को पूरा नही कर सकती। हसदेव को लूट, लालच और मुनाफे के लिए खत्म किया जा रहा हैं। सबसे बढ़ा दर्द होता है अपनी जड़ों से उजड़ जाना, विस्थापित हो जाना सरकारें इस बात को नही समझना चाहती।
आज हसदेव, सिलगेर, नई राजधानी के किसानों सहित संविदा कर्मचारी, मितानिन आदि अपने जीवन जीने की लड़ाई लड़ रहे है । इन संघर्षों को आज जोड़ने की जरूरत है क्योंकि सरकारें बेशर्म हैं।






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मोदी विदेश में जाकर कहते हैं कि हम वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ाएंगे, कोयला की खपत कम करेंगे और भारत में आकर कोयला आधारित बिजली को बढ़ाने का कार्य करते हैं, नई खदाने खोल रहे हैं। जब 2030 में 50 प्रतिशत बिजली वैकल्पिक ऊर्जा से आयेगी तो ये नई खदाने क्यों खोली जा रही है।
प्रदर्शन स्थल से केंद्र और राज्य की ऊर्जा नीतियों और वैश्विक मंचों पर वैकल्पिक ऊर्जा को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावों की जमीनी स्थिति और सरकार के लचर रवैया पर भी तीखी टिप्पणी की जा रही है।
