आनन्दमार्ग प्रचारक संघ द्वारा त्रिदिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का शुभारंभ
आनन्दमार्ग प्रचारक संघ रायपुर द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय सेमिनार का शुभारंभ फरीदाबाद,दिल्ली, से आये आनन्दमार्ग के वरिष्ठ संन्यासी आचार्य वन्दनानन्द अवधूत के कर कमलो द्वारा मार्ग गुरु श्रीश्री आनंदमूर्ति के चरणों में माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करके किया गया. इस अवसर पर रायपुर भुक्ति के डायोसीस सेक्रेटरी आचार्य अर्पितानंदा अवधूत ,रायपुर से ही आचार्य रितेशवारानंद अवधूत,दुर्ग भुक्ति से आचार्य मनातमानन्द अवधूत, बालाघाट से आये आचार्य सुषमितानन्द अवधूत,आचार्य नितज्ञानंद अवधूत भी उपस्थित थे . रायपुर के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के अन्य शहरो आये मार्गियों ने इसमें भाग लिया. सेमिनार एक निश्चित समय सारिणी के अनुसार संचालित हुआ जिसमे सुबह प्रभात फेरी, योगासन , सामूहिक साधना के उपरांत सेमिनार के मुख्य वक्ता आचार्य वंदनानन्द अवधूत ने “सेमिनार की महत्ता “विषय पर प्रकाश डाला . सेमिनार के मुख्या अंगो में से दो- ज्ञान और कर्तव्य निर्धारण पर बोलते हुए धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की विवेचना की. श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा प्रतिपादित सामाजिक-आर्थिक दर्शन ” प्रउत ” के इतिहास और सरचना से अवगत करते हुए प्रउत को आज की विषम समस्याओ जैसे बेरोज़गारी और गरीबी के उन्मूलन का अकाट्य समाधान बताया .
भोजन उपरान्त सत्र में वरिष्ठ संन्यासी आचार्य द्वारा “ज्ञान और कर्म” विषय [पर अपना वक्तव्य पेश किया . सरल शब्दों में व्याख्या कर इसे समान्य जन के लिए ग्राह्य सुलभ बनाया.तदपश्चात भक्तजनो के प्रश्नो के उत्तर दिए गए. उनके उत्तरो से प्रायः सभी संतुष्ट रहे. संध्याकालीन सामूहिक साधना और योगासन अभ्यास करने के बाद रात्रिकालीन सत्र में “विवेक पंचक” विषय पर वक्तव्य हुआ जिसे उपस्थित सभी भक्तजनो ने रुचिपूर्ण रूप से ग्रहण किया. प्रश्नोत्तर के बाद सामूहिक साधना और भोज संपन्न हुआ.
प्रथम दिन के सेमिनार के सारिणी के अनुसार अंतिम कार्यक्रम “कथा कीर्तन” रहा जिसमे सभी भक्तजन अपने अनुभवों और अनुभूतियों को साँझा कर भक्ति की लहर में स्पंदित होकर कीर्तन करते हैं. प्रथम दिन का सेमिनार इसी भक्तिमय बिंदु पर समाप्त हुआ.
