रायपुर । उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल विगत 12 वर्षों से उत्कृष्ट चिकित्सा एवं सर्वोत्तम मानवीय मूल्यों की परिकाष्ठा गढ़ता आया है। गत वर्षों में प॔डरी व फिर मोवा स्थित 50 बेड हॉस्पिटल से सफल सर्जरी एवं अनगिनत संतुष्ट परिवारों से जुड़ा यह स्वास्थ संस्थान दिन प्रतिदिन सफलता के नए आयाम स्थापित करता आया है।
डी. विनोद सिंह के नेतृत्व में यह संस्था मानवीय जीवन एवं मरीजों के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए बहुत ही तत्परता एवं तल्लीनता से आगे बढ़ रही है। इसी श्रृंखला में एक और आयाम जोड़ते हुए उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल की नई एवं उत्कृष्ट उपलब्धि है 150 बेड की क्षमता वाला नया मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल जो कि 29 अक्टूबर को रायपुर स्थित भाटगाव में उद्घाटित किया जा रहा है
यहाँ के मुख्य एवं लीड चिकित्सक डॉ. विनोद सिंह ने बताया कि नवनिर्मित हॉस्पिटल भवन में हमारे शरीर से जुड़े सभी विभागों की चिकित्साका प्रबंध है जैसे विभाग कैंसर, स्त्री रोग, शिशु रोग, चर्म रोग, जीवनशैली रोग आर्थोपेडिक विभाग, विभिन्न प्रकार कि शल्य चिकित्सा का प्रबंध आदि यहाँ ज्ञात रहे कि डॉ. विनोद सिंह स्वयं एक जाने माने जनरल सर्जन है जिससे उपचार कराने हेतु मरीज न केवल छत्तीसगढ़ पर ओडिसा,मध्य प्रदेश आदि राज्यों से आते है






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डॉक्टर विनोद सिंह ने प्रेस और साथियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि उनकी एवं संस्था कि मूल्य एव॔ सेवा सर्वोपरि है। उनके उम्बोधन में इस बात पर बार बार जोर दिया गया कि उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा हर इंसान का अधिकार है एवं उनकी संस्था यह सुनिश्चित कर रही है की सामान रूप से हर मरीज को बेहतर से बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध हो सके।
यू. एम. एच. की टीम के मिशन (पेशेंट केयर सर्वोपरि) को एक नया आयाम देने के लिए मुंबई के कॉर्पोरेट ट्रेनर से अनुबंध किया है, जिन्होंने यू. एम. एच. की पूर्ण स्टाफ टीम की आठ दिनों का ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया हस्पिटल मैनेजमेंट के सहयोग से), जिसका प्रतिबिम्ब व परिणाम प्रामाणिक रूप से लोगो में दिखेगा यू. एम. एच. नईमध्य संरचना, नई आधुनिक सेवाएं, नई कार्य संस्कृति। डॉ. विनोद सिंह ने बताया कि हमारी पूरी कोशिश रहेगी की हम मरीजों को छत्तीसगढ़ से बाहर नहीं जाने देना चाहते है और हमारी संस्था मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध देकर मरीजों को राहत पहुंचाना चाहते हैं । वहीं न्यूरो से संबंधित रोगों के बारे में छत्रपाल सिंह साहू ने बताया कि स्ट्रोक के मरीजों स्थिति अनुसार दवाई लेते रहना चाहिए जिससे मरीज को फिर स्ट्रोक ना आये ।
