रायपुर। नल घर चौक स्थित सुराना भवन में भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति की ओर से दिव्यांगों के लिए पांच दिवसीय प्रदेश स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया है। रविवार को पैर कटे दिव्यांगों के पैर का नाप लिया गया। अब उनके लिए टीम जयपुर पैर तैयार कर रही है। फिर उन्हें समिति के द्वारा पैर वितरण किया जाएगा। यह शिविर 22 दिसंबर तक चलेगा। भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष महेन्द्र कोचर और मुख्य सलाहकार विजय चोपड़ा ने बताया कि शिविर में हाथ कटे 50 दिव्यांगों का परीक्षण कर उन्हें लखनवी हाथ दिए जाएंगे। श्री विनय मित्र मण्डल के अध्यक्ष महावीर मालू ने बताया कि जिनके जयपुर पैर लगवाने पैर कटे दिव्यांगों को भी परीक्षण किया जा चुका है। अब उनके लिए टीम पैर बना रही है जिसके बाद उन्हें यह वितरण किया जाएगा।
शिविर में आए दिव्यांगों से जाना हालचाल






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1. शिविर का लाभ लेने पहुंचे बिलासपुर के सुनील टंडन बताते है कि 2016 के दौरान वे शाम को अपने छत पर घूम रहे थे। बरसात का मौसम था और छत पर पानी पड़ा हुआ था, घर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन थी। गलती से तार छूआ जाने से करंट का झटका बड़ी जोर से पड़ा, इसके चलते सिर, पीठ, हाथ और पैर के कई हिस्से जल गए। शिविर में सुनील जयपुर पैर लगवाने आये है। जीविकोपार्जन के लिए घर में आटा चक्की खोली। कई दिन बीत गए लेकिन आमदनी नहीं बढ़ी तो लोगों से सलाह ली और एक ई रिक्शा खरीदी। अब उससे ही परिवार चलता है।
2. भटगांव, बिलाईगढ़ से शिविर का लाभ लेने आए लोचन प्रसाद देवांगन 1998 से शिक्षाकर्मी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 2006 में सारागांव के पास एक बस और ट्रक की टक्कर हो गई। इस दौरान लोचन उसी बस में सवार थे और उनकी कोहनी बस में फंस गई। हाथ को निकाला गया फिर उसे काटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। हाथ काटना पड़ा। एक दोस्त के माध्यम से उन्हें इस शिविर के बारे में पता चला और वे रायपुर आ गए।
3. धमतरी के भेंड्रा गांव के ओम प्रकाश साहू बताते हैं कि सितंबर 2021 में ट्रक को ओवरटेक करते समय स्लिप खाकर बाइक से गिर गया। इसी दौरान मेरा सिर ट्रक के नीचे आने वाला था कि मैंने अपने हाथ की आड़ लेकर अपने सिर को जल्दी से हटा लिया लेकिन इस हादसे में मेरा हाथ बुरी तरह से जख्मी हो गया। मूलतः वे किसानी का काम करते हैं और पहली बार शिविर में कृत्रिम हाथ लगवाने आए हैं।
4. रायगढ़ से शिविर में जयपुर पैर लगवाने पहुंचे ऋषि कुमार पटेल बताते हैं कि 2019 में हुए एक दुर्घटना के बाद उनका दाहिना पैर काटना पड़ा। वे एक कंपनी में बतौर मैनेजर के रूप में कार्य करते थे। अब गांव में परिवार के साथ खेती कर रहे हैं। शिविर के आयोजकों का उन्होंने आभार जताया है कि उनके सहयोग से जयपुर पैर लगाया जा रहा है।
5. सरायपाली से आए उधरलाल हैं कि वे गांव में मजदूरी का काम करते हैं। 5 साल पहले वे काम के दौरान छत से गिर गए और उन्हें कमर में चोट लगी। साथ ही पैर भी जख्मी हो गया, उसके बाद पैर में इंफेक्शन हो गया जो कि ठीक नहीं हो रहा था इसके चलते पैर कटवाना पड़ा। पैर कटे अब तीन महीने हो चुके हैं, पहली बार वे जयपुर पैर लगवा रहे।
