Raipur
इंडियन फार्माससिस्ट एसोसिएशन रायपुर के सदस्यों ने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट एवं फार्मेसी एक्ट के उन्लघन को रोकने हेतु रायपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है जिसमे निम्न मुद्दों पर कार्यवाही की माँग सदस्यों द्वारा की गई है राज्य के फार्मासिस्ट लम्बे समय से अपनी मांगे प्रशासन के समक्ष रख रहे हैं, किंतु समाधान न होने से फार्मासिस्टों में अत्यंत आक्रोश व्याप्त है । वर्तमान समय में जिले में स्थित मेडिकल स्टोरों द्वारा धड़ल्ले से बगैर फार्मासिस्ट के एवं बगैर डॉ प्रेस्क्रिपसन के नशीली दवाएं एवं एंटीबायोटिक दवाएं खुले आम बेचीं जा रही है जिससे नार्कोटिक्स एवं सायकोट्रोपिक दवाओं के प्रति लोगों में खासकर बच्चों में बुरी लत लग रही है | गैर प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा दवा दूकान संचालित करने के कारण नशा करने वाले बच्चों को आसानी से नशीली दवाएं उपलब्ध हो जा रही है साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है | हाल ही में गैर फार्मासिस्ट कर्मचारी द्वारा गलत दवा देने से सिम्स बिलासपुर स्थित रेडक्रॉस मेडिकल स्टोर में एक महिला का गर्भपात हो गया जो कि बेहद ही गंभीर घटना है जिसको लेकर कार्यवाही की मांग की गई है। भारत सरकार द्वारा जारी फार्मेसी प्रेक्टिस रेगुलेशन 2015 (PPR-2015) के प्रावधानानुसार एवं ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 के अनुसार राज्य की समस्त फार्मेसी सेवाएं संचालित हो, जिसके अंतर्गत प्रत्येक औषधी विक्रय केंद्र में पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य हो तथा साईन बोर्ड पर फार्मासिस्ट का नाम , योग्यता, पंजीयन क्र., लाइसेंस न. अनिवार्य रुप से दर्शाया जाय उक्ताशय के खाद्य एवं औषधि प्रशासन छ.ग. के पुर्व प्रसारित निर्देशों (प्रतिलिपि संलग्न) का राज्य में कहीं भी पालन नही हो रहा है | ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 का कड़ाई से पालन करवाने हेतु सेन्ट्रल ड्रग स्टैण्डर्ड कंट्रोल ओर्गेनाईजेशन (CDSCO) के द्वारा कई बार छत्तीसगढ़ औषधि नियंत्रक को पत्र लिखा गया है तथा इस संबंध में पूर्व में संगठन द्वारा जिला उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन को शिकायत किया गया है | खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा शिकायत करने पर केवल खानापूर्ति के लिए मेडिकल संचालक को नोटिस दे दिया जाता है तथा पुराने फार्मासिस्ट का नाम लाइसेंस से हटाकर किसी अन्य फार्मासिस्ट का नाम लाइसेंस में जोड़ दिया जाता है यह सब केवल कागजो में ही किया जा रहा है वास्तव में फार्मासिस्ट कही भी उपस्थित नहीं रहते हैं | राज्य में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 नियमावली 1945 के उपनियम 62(2) के विरुद्ध विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कंपाउडर, साहायक ग्रेड 3, ANM, मितानिन आदि दवा वितरण का कार्य निस्पादित कर रहें हैं जिसके कारण आये दिन नसबंदी कांड, अंखफोड़्वा कांड, गर्भासय कांड, फाईलेरिया कांड आदि दुर्घटनायें हो रही है कृपया गैरफार्मासिस्ट व्याक्तियों द्वारा दवा संबंधी कार्य में तुरंत रोक लगा कर उनके खिलाफ उचित कार्यवाही और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ऑफिसिअल वेबसाईट में औषधि निरिक्षको द्वारा फार्मासिस्ट के फर्म से त्यागपत्र देनें के तत्काल बाद उक्त मेडिकल से नाम नहीं हटाया जाता है तथा तत्काल फर्म संचालक को नोटिस भी जारी नहीं किया जाता है नोटिस जारी नहीं होने से फर्म संचालक बगैर किसी फार्मासिस्ट के औषधियों का क्रय-विक्रय जारी रखता है चुंकि जिले में स्थित किसी मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा कर्मचारी फार्मासिस्ट को नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता है अतः 1 महिना पुर्व फार्मासिस्ट द्वारा सुचना दिया जाना व्यावहारिक रुप से संभव नहीं है साथ ही वेबसाईट में मेडिकल स्टोर के संचालक (प्रोपाईटर) की जानकारी भी दर्ज नहीं रहती है इशलिये वेबसाईट को तत्काल अपडेट करने का कष्ट कर फार्मासिस्ट का त्यागपत्र देनें एवं लाईसेंस होल्डर द्वारा फार्मासिस्ट बदलने की प्रकृया को पुर्णतः आनलाईन किया जाये । निजी मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा कर्मचारी फार्मासिस्ट को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान करवाने और औषधि लाईसेंस बनाने के लिये आवश्यक दस्तावेजों में यदि फार्मासिस्ट स्वयं फर्म का मालिक नहीं है केवल फर्म का कर्मचारी है तब फार्मासिस्ट का नियुक्ति पत्र जो कि फर्म के संचालक द्वारा जारी किया हो एवं मुहर लगा हुआ हो को भी शामिल किया जाये क्योकि जिले के समस्त शासकीय एवं निजी मेडिकल स्टोरों में श्रम कानुन का उलंघन हो रहा है | फार्मासिस्ट से नियमतः आठ घंटे की ड्युटी से अधिक कार्य लिया जा रहा है एवं इसके बदले फार्मासिस्ट को अतिरिक्त भुगतान भी नहीं किया जा रहा है तथा श्रम कानुन के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्युनतम वेतन भी नहीं प्रदान किया जा रहा है | समस्त निजी मेडिकल स्टोर 12 से लेकर 14 घंटे खुलते हैं अतः प्रत्येक मेडिकल में नियमतः दो पंजीकृत फार्मासिस्ट को संलग्न करने हेतु निर्देशित करें। राज्य में पंजीकृत फार्मासिस्टों की संख्या 28 हज़ार है जिसमे से अधिकांश बेरोजगारी से जूझ रहे हैं |
जिले के मेडिकल स्टोरों में एक्ट के मुताबिक नियत समयांतराल में औषधि निरीक्षको द्वारा निरिक्षण नहीं किया जा रहा है, कई-कई वर्षों तक मेडिकलों का निरिक्षण नहीं किया जाता है बल्कि औषधि निरिक्षको द्वारा प्रतिवर्ष प्रति मेडिकल स्टोर से 5000 रु वसुली किया जा रहा है साथ ही नया रिटेल ड्रग लाईसेंस बनाने के लिये औषधि निरिक्षकों द्वारा 30000 रु से लेकर 50000 रु तक मोटि रकम वसुल की जा रही है जबकि शासकीय शुल्क 3000/- रु मात्र है ।
जिले के होलसेल दवा व्यापारियों द्वारा ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के विरुद्ध जाकर बगैर लाईसेंसधारी तथाकथित झोलाछाप (डॉक्टरों) को शेड्युल ड्रग धड़्ल्ले से बेचा जा रहा है साथ ही औषधि भंडार लाइसेंस धारक एवं कॉस्मेटिक दुकान व किराना दुकानदारों को पेन किलर व गोरा करने वाली स्टेराइड युक्त एलोपैथी क्रीम धड़ल्ले से विक्रय किया जा रहा है जिसके कारण आम लोगो में एंटीबायोटिक दवाओ के प्रति प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होते जा रही है |उक्त मांगो का शीघ्र निराकरण करने के लिए इंडियन फार्मासिस्ट एसोशिएसन के सदस्यों ने ज्ञापन सौंपा जिस पर रायपुर कलेक्टर ने मामले को संज्ञान मे लेकर तत्काल कार्यवाही करने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया है। जिसमे मुख्य रूप से इंडियन फर्मासिस्ट एसोसिएशन से डॉ.विनोद वर्मा सचिव लक्ष्मीकांत यादव ,कोमल साहू,अभिषेक रात्रे, देवाशीष रामटेके, सुनील सिन्हा ,प्रशांत साहू, गोविंद, हिलेंद्र साहू, सालिक ओझा उपस्थित रहे।








