कका बघेल की राह में भी आसान नहीं और ना ही बीजेपी प्रत्याशी पांडेय की,फैसला करेगी अब जनता ,कौन पहुंचता जीतकर दिल्ली
छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव लोकसभा सीट प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है, यह सीट तो छत्तीसगढ़ में बीजेपी का गढ़ माना जाता है लेकिन इस बार राजनांदगांव सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनावी मैदान में उतारकर मुकाबला कांटे का कर दिया है। भाजपा ने इस सीट से सांसद संतोष पांडे को दोबारा टिकट दिया है. और दोनों ही प्रत्याशी के लिए यह सीट जीतना अब प्रतिष्ठा का बन गया है ।दोनों प्रमुख पार्टियां अपनी जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं. लगातार इस लोकसभा सीट में बड़े नेता चुनाव प्रचार के लिए आ रहे हैं.






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छत्तीसगढ़ में कका के नाम से मशहूर भूपेश बघेल राजनांदगांव में चक्रव्यूह को भेदने मे सफल होते है यह अब जनता के हाथ में चला गया है। शहर एवं ग्रामीण इलाकों में बघेल बीजेपी के किलें को भेदने में सफल होते हैं या नहीं यह तो अब भविष्य ही तय करेगी।
किसान वर्ग का मानना है कि मुख्यमंत्री रहते बघेल ने उनके लिए काफी काम किया है। लेकिन, यह चुनाव बीजेपी अब मोदी की गारंटी पर लड़ रही है और यही बघेल की सबसे बड़ी चुनौती है।
दिल्ली पहुंचने के लिए बघेल ने दिन-रात एक कर रखा है। बघेल को ग्रामीण इलाकों से ज्यादा उम्मीद है। इसलिए राजनांदगांव, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह विधायक हैं, जैसे इलाकों को छोड़कर वह खैरागढ़, डोगरगांव, कवर्धा और पंडरिया जैसे इलाकों में ज्यादा जोर लगा रहे हैं। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद संतोष पांडेय को फिर उतारा है।
भाजपा एक और जहाँ मोदी मैजिक पर भरोसा कर रही है तो जीत के प्रति आश्वस्त होकर कांग्रेस ने मोर्चा फतह करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। जातिगत समीकरण, प्रचार सामाग्री का सही विवरण, एक-एक वोटर की ट्रैकिंग, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और सोशल मीडिया पर प्रचार से लेकर भाजपा समर्थक माने जाने वाले वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश, हर रणनीति कांग्रेस पूरी शिद्दत से अंजाम दे रही है।
उधर, भाजपा ने मौजूदा सांसद संतोष पांडे को मौका दिया है,हालाँकि बीजेपी को अपने परपंरागत मतदाताओं के अलावा मोदी मैजिक पर पूरा भरोसा है। मौजूदा सांसद संतोष पांडेय का सहज व्यवहार और इलाके में कराए गए काम भी उनके काम आ रहे हैं। गढ़बो नया छत्तीसगढ़ का नारा कभी कांग्रेस ने दिया था लेकिन अब जैसे भाजपा ने इसे अपना लिया है।
