एस एच अज़हर दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा, सुकमा, और बीजापुर जिलों के आदिवासी ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह से नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) की किरंदुल और बचेली परियोजना के चेकपोस्ट को जाम कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। भारी बारिश के बीच रेनकोट और छाते के साथ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि एनएमडीसी की हालिया एल-1 और एल-2 स्तर की भर्ती प्रक्रिया में परियोजना से प्रभावित स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाए।संयुक्त पंचायत के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल हैं, जो अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। एनएमडीसी, एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, बैलाडिला आयरन ओर माइन्स में लौह अयस्क खनन करती है। कंपनी ने हाल ही में किरंदुल, बचेली, और डोनिमलई परिसरों में फील्ड अटेंडेंट, मेंटेनेंस असिस्टेंट, ब्लास्टर, इलेक्ट्रीशियन जैसे ट्रेनी पदों के लिए 995 रिक्तियों की घोषणा की थी।स्थानीय आदिवासी समुदाय का आरोप है कि इन भर्तियों में बाहरी उम्मीदवारों को तरजीह दी जा रही है, जबकि खनन गतिविधियों से प्रभावित स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा रहा है। उनका कहना है कि खनन के कारण उनकी जमीन, आजीविका, और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है, इसलिए उन्हें रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।आंदोलन के चलते ग्रामीणों ने किरंदुल और बचेली परियोजना के प्रवेश द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गुरुवार सुबह 4 बजे से चेकपोस्ट पर अपनी मौजूदगी सुनिश्चित की है। ग्रामीणों का यह प्रदर्शन उनकी मांगों के प्रति गंभीरता और एकजुटता को दर्शाता है।









