सिद्धार्थ और श्राविक के योगदान के साथ 21 वर्षों बाद भी ग्राहक का विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी



रायपुर । मेरे लिए ज्वेलरी का व्यापार केवल आभूषण बेचने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और विश्वास से जुड़ने का जरिया है।” 1990 में राकेश इंडस्ट्री से शुरुआत कर सराफा बाजार को समझा और 2006 में शुभ ज्वेलर्स की नींव रखी। शुद्धता, पारदर्शिता और ऑथेंटिक डिजाइन हमारी कार्यशैली का आधार रहे। आज बेटों सिद्धार्थ और श्राविक के योगदान के साथ 21 वर्षों बाद भी ग्राहक विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। कहना है शुभ ज्वेलर्स के डायरेक्टर शिवराज बैद (हप्पू) का उनका कहना कि सोने के पारंपरिक कारोबार को अब दोनों बेटे सिद्धार्थ बैद और श्राविक बैद आगे बढ़ा रहे हैं।
शुभ की परंपरा को आगे बढ़ा रहे सिद्धार्थ बैद और श्राविक बैद
सोने के पारंपरिक कारोबार को आधुनिक ज्ञान और तकनीक से जोड़ने के लिए शिवराज बैद ने अपने बेटों सिद्धार्थ और श्राविक को अमेरिका भेजा। दोनों ने GIA America से डायमंड एजुकेशन और ज्वेलरी डिजाइनिंग की शिक्षा ली। भारत लौटकर उन्होंने तकनीकी समझ, रचनात्मकता और आधुनिक डिजाइन को शुभ ज्वेलर्स के कारोबार में जोड़ा।
300 स्क्वायर फीट से शुरुआत कर; आज 8 हजार वर्गफीट का भव्य शोरूम
महज 300 स्क्वायर फीट से शुरू हुआ शुभ ज्वेलर्स आज 8 हजार वर्गफीट के भव्य शोरूम तक पहुंच चुका है। पारदर्शिता, शुद्धता, सेवा भावना और धर्मपूर्वक व्यापार इसकी कार्यशैली का आधार हैं। आज शिवराज बैद अपने बेटों के साथ सफर आगे बढ़ा रहे हैं। शोरूम में गोल्ड, डायमंड और जड़ाऊ ज्वेलरी उपलब्ध है।
शुभ परिवार; सहचरों के बगैर सफलता संभव नहीं
21 वर्षों से परिवार और टीम का सहयोग शुभज्वेलर्स की सबसे बड़ी ताकत रहा है। यहां हर सहचर केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि शुभपरिवार का अभिन्न हिस्सा है। ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के साथ टीम ग्राहकों को बेहतर, सम्मानजनक और आत्मीय अनुभव देने का प्रयास करती है। साथ चलने वाला यह परिवार ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
अटूट भरोसा; सम्माननीय ग्राहकों और शुभचिंतकों का
शुभ ज्वेलर्स के डायरेक्टर शिवराज बैद का कहना है कि ग्राहकों और शुभचिंतकों के अटूट विश्वास व प्रेम के बिना यह मुकाम संभव नहीं था। 21 वर्षों में ग्राहक शुभ परिवार का हिस्सा बने। उनकी पसंद, जरूरत और भावनाओं को समझकर बेहतर सेवा देना हमारी प्राथमिकता रही है। ग्राहकों की संतुष्टि, खुशी और वर्षों से कायम रिश्ते ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं।
