दांतेवाड़ा । सामाजिक कार्यकर्ता संजय पंत दंतेवाड़ा ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ में बस्तर के माहरा समुदाय के लोग अपनी जाति को लेकर कई सालों से संघर्षरत हैं। लेकिन आज तक माहरा जाति को न्याय प्राप्त नहीं हो सका है । माहरा समुदाय के लोग एवं पढ़ने वाले बच्चों के लिए जाति प्रमाण पत्र नहीं बना पा रहे हैं जिससे काफी परेशानी हो रही है। और बच्चों के भविष्य पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है।
संजय पंत ने कहा कि बीजेपी की सरकार 15 साल तक छत्तीसगढ़ राज्य में सत्ता में थी इस दौरान बीजेपी सरकार भी माहरा समुदाय के लोगों को हक, अधिकार व न्याय
नहीं दे पाई ना दिलवा पाई। माहरा समुदाय के लोगों के साथ 15 साल तक छल कर गुमराह करने का काम किया और आज पर्यंत तक जाति संबंधित न्याय प्राप्त नहीं होना भी एक बहुत बड़ा षड्यंत्र ही था जिससे आज माहरा समुदाय के लोगों को व बच्चों को काफी परेशानी का सामना कर भुगतना पड़ रहा है।






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संजय पंत ने यह भी कहा कि माहरा समाज से जो लोग संभागीय अध्यक्ष या पदाधिकारी बने हैं या बनाए गए हैं वे लोग भी समाज को गुमराह कर राजनीतिकरण करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है । आज भी जो लोग संभाग में संभागीय अध्यक्ष व पदाअधिकारी बंधे है वे लोग भी समाज में अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए है ,और अपने निजी उद्देश्य को पूरा करने में जोर शोर से लगे हुए है। और समाज को गुमराह कर राजनीतिकरण करते नजर आ रहे हैं। जोकि समाज हित में नहीं है,
संजय पंत ने कहा कि जो लोग पहले कई सालों से समाज का नेतृत्व करते आ रहे हैं उन्हें सोचना चाहिएथा कि युवाओं को नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए और खुद सलाहकार बन कर साथ देते हुए समाज को अपना हक अधिकार व न्याय प्राप्त करने हेतू संघर्ष करना चाहिए था। पर ऐसा ना करके फिर से पिछले नेतृत्व कर्ताओं को संभाग में पुनः संभागीय अध्यक्ष व पदाधिकारी बन जाना या बनाया जाना कहीं ना कहीं फिर राजनीतिक षड्यंत्र का खेल खेला जा रहा है जो साफ साफ देखा जा सकता है। पुनः हम समाज के सभी लोगों से निवेदन करते हैं कि समाज को राजनीति करण करने का प्रयास ना करें।
संजय पंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की डेढ़ से दो साल का कार्यकाल बचा हुआ है ,और फिर पुनः विधानसभा का चुनाव होने वाला है कांग्रेस की सरकार रहते ही समाज का काम हो जाना चाहिए था पर होता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि जो लोग राजनीति पार्टियों में कार्य कर रहे है,वही लोग समाज के नेतृत्वकर्ता बनाए गए हैं। जबकि युवा पढ़े-लिखे साथियों को नेतृत्व करने का मौका देते हुए समाज को अपने हक अधिकार व न्याय प्राप्त कराने हेतू कदम से कदम मिलाकर साथ देते हुए निस्वार्थ भाव से संगठित होकर समाज के लिए संघर्ष करते हुए समाज को अपने हक अधिकार दिलवाने का काम करना चाहिए थाऔर समाज के सभी बुद्धिजीवी पदाधिकारी एवं सभी सदस्यों को मिलकर समाज का काम को करना था तब जाकर समाज को अपने हक अधिकार प्राप्त हो पाएगा। राजनीतिकरण से समाज को दूर रखने की कोशिश रहे समाज हित में।
