रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के इस आयोजन में राज्य स्तरीय चित्रकला, नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन होना है और इस महोत्सव में सभी का स्वागत है,उन्होंने आगे कहा कि सरगुजा से बस्तर तक जनजातियों की अलग भाषा व शैली है छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध है,
पिछले तीन वर्षों में नक्सली समस्या कम हुई है
राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव हमने आयोजित किया वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो गया है, उन्होंने बताया कि बस्तर में बादल नाम से संस्था बनाई है, जिसमें वहां की भाषा, संस्कृति को आगे बढाने का काम होता है, वहां विलुप्त हो रही नृत्य शैली को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का आयोजन हो रहा है, मुख्यधारा और आदिवासी समाज के बीच में सेतु नहीं है , तीन दिवसीय कार्यक्रम निश्चित रूप से दोनों धाराओं के बीच मे सेतु का काम करेगा ।
आदिवासियों को नमक के अलावा किसी चीज की आवश्यकता नहीं थी उन्हें सभी चीज जंगल में मिल जाती थीं लेकिन धीरे धीरे वृक्ष कटते गए और साधन कम हो गये हमने पिछले तीन साल में सुनिश्चित किया है कि जंगल में फलदार वृक्ष ही लगेंगे, इससे आदिवासियों की आवश्यकता भी पूरी होगी । श्री बघेल ने बताया कि आदिवासियों से लघु वनोपज भी खरीद रहे हैं । जो प्रजाति लुप्त हो रही है उसे भी हमे बचाना है । उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ ही केवल भाषा और संस्कृति साहित्य को ही नही बचाना है हमे लोगो को भी बचाना है उस आर्य संस्कृति और लोगों की बचाना है ।
