रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार के संरक्षण में तमाम भाजपा शासित राज्यों में अवैध तरीके से बुलडोजर चलाकर लोगों के आशियाने को उजाड़ने की कार्यवाही की जा रही है। इसे त्वरित न्याय के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि ऐसी मुहिम का हमारे देश के कानूनों और न्याय की लोकतांत्रिक अवधारणा से कोई संबंध नहीं है l आरएसएस-भाजपा की इस मुहिम का छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन कड़े शब्दों में भर्त्सना करती हैl यह मुहिम वास्तव में इस देश के मुस्लिम समुदाय को डराने-धमकाने और उनके नागरिक अधिकारों को कुचलकर उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक होने का अहसास दिलाने की हिंदुत्ववादी राजनीति से प्रेरित है।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़े विभिन्न संगठनों ने अपने साझा बयान में कहा है कि संविधान, लोकतंत्र और पूरी न्याय व्यवस्था को कुचलते हुए मोदी-योगी-शिवराज सरकार इस देश के खिलाफ हमलों में जिस प्रकार से बुलडोजर का उपयोग कर रही है, उसे उचित ही ‘बुलडोजर राजनीति’ के रूप में निरूपित किया जा रहा है। यह राजनीति राष्ट्रवाद का चोला ओढ़कर सामने आ रही है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुसंख्यकों में नफरत की भावना भर रही है। यह हमारी उस बहुलतावादी सोच और सांस्कृतिक विविधता के खिलाफ है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में पूरे देश की जनता को एकजुट किया था और जिसने आधुनिक भारत को विकसित किया है। आजादी के अमृत काल में इस परंपरा और विरासत को बढ़ावा देने के बजाए देश के अल्पसंख्यक नागरिकों के खिलाफ विषवमन करने से देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ गई है।
विश्व में इजरायल जैसे देशों में विरोध कर रहे फिलिस्तीनियों (जो अधिकांश मुसलमान हैं) के घरों को बुलडोज करना दशकों से होता आया है, जिसकी संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों ने अनेक बार तीखी भर्त्सना की है पर इजराइल ने किसी की एक न सुनी है। मोदीराज में भारत और इजरायल के संबंध और घनिष्ठ हुए हैं, खास कर के “युद्ध” संबंधित मामलों में। भारत ने इजरायल से हाथियारों की डील की हैं, उनके द्वारा हमारे जवानों की ट्रेनिंग भी होती रही है, उनसे पेगासस खरीद कर उसका इस्तमाल किया है| भारत एक लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद एक occupying force की नक़ल कर रहा है। क्या भारत का यह नवीन बुलडोजर राज भारत के लोकतंत्र में एक खतरनाक मोड़ का अंदेशा देता है ?
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने कहा है कि नफरत की यह मुहिम केवल अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि देश के आदिवासियों, दलितों और महिलाओं के ऊपर भी यह हमले तेज होंगे। वास्तव में बुलडोजर इस देश के सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर उन सभी तबकों पर चलने वाला है, जो इस देश की सरकारों की कॉरपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ संघर्ष के मैदान में उतरेंगे। इसकी एक झलक इसी बात में दिख रही है कि किस प्रकार भाजपा सरकार ईडी, सीबीआई और एनआईए जैसी स्वायत्त एजेंसियों का दुरूपयोग अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कर रही है। राज्य व्यवस्था में संविधान सम्मत स्वतंत्र संस्थाओं के नियमो में भी परिवर्तन कर उन्हें कमजोर किया जा रहा है l यहां तक कि रक्षा सरंचना में घुसपैठ (CDS सिलेक्शन प्रक्रिया तथा अग्निपथ परियोजना इत्यदि नियमों में परिवर्तन) किया जा रहा है |
सीबीए ने कहा है कि भाजपा-आरएसएस देश के लोकतांत्रिक मानस को फासीवादी बनाने की मुहिम में जुटी है और मुसलमानों पर हमले के रूप में बुलडोजर को प्रतीक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। वह लोगों की तर्क और विवेक की शक्ति को खत्म करना चाहती है, ताकि उसके सांप्रदायिक मंसूबे पूरे हो सके। इसके ज़रिये एक मानसिकता तैयार की जा रही है ताकि कोई भी विरोध, खास तौर पर शोषित पीड़ित समाज की आवाज को दबाते हुए एक फासीवादी-मनुवादी “आज्ञापालक समाज” बनाने की पुरजोर कोशिश हो रही है। इस मुहिम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश की फजीहत हुई है।
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कानून और संविधान की रक्षा के प्रति तथा इस देश की धर्मनिरपेक्ष परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संवेदनशील होने के नाते और गरीबों के सामाजिक-आर्थिक हितों के प्रति सचेत संगठन होने के नाते भाजपा-आरएसएस की इस मुहिम का कड़ा विरोध करते हैं और हमें आशा है कि इस देश की जनता नफरत की इस मुहिम को ठुकरायेगी। हम सब बुलडोजर संस्कृति को स्थापित करने के खिलाफ संविधान और कानून सम्मत न्याय की संस्कृति को बचाने-बढ़ाने के संघर्ष में लगे रहेंगे, ताकि हम अपनी भावी पीढ़ी को एक लोकतांत्रिक, सुंदर और सभ्य भारत सौंप सके।
