किरंदूल । सुन्नी मदीना मस्जिद में ईद उल अजहा की विशेष नमाज अदा की गई सुबह से ही छोटे बड़े बुजुर्ग बच्चे सब नए-नए कपड़े पहनकर इत्र लगाकर मस्जिद में शिरकत किए और विशेष नमाज अदा की आपको बता दें करीब 2 साल के बाद सुन्नी मदीना मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई है गौर तलब है की कोरोना काल के वजह से मस्जिदों में ईद उल फितर व ईद उल अजहा की नमाज 2 वर्ष से नहीं हो पा रही थी जिस वजह से इस वर्ष ईद उल अजहा की नमाज अदा करने के लिए सैंकरो कि संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित हुए इस दौरान सुन्नी मदीना मस्जिद के मौलाना इकबाल रज़ा ने ईद उल अजहा की विशेष नमाज अदा करवाई और मुल्क में अमन व चैन की दुआएं मांगी गई ईद उल अजहा का त्यौहार बलिदान त्याग भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है इस त्यौहार को हज़रत इब्राहीम व हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की सुन्नत के तौर पर मनाया जाता है आपको बता दें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के सपने में खुदा ने उन्हें बताया कि तुम अपनी कोई जान से प्यारी चीज़ को कुर्बान करो वह सपना करीब 2 से 3 बार हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को आया फिर उन्होंने सोचा कि हमारे जान से ज्यादा अज़ीज़ चीज़ है कौन जिसे मै खुदा कि राह में कुर्बान करू फिर उन्होंने सोचा हमारे लख्ते जिगर हज़रत इस्माइल अस्सलाम भी हमें जान से प्यारे हैं उन्हें खुदा की राह में खुदा की रज़ा के लिए ने कुर्बान कर दूं इसी तरह उन्होंने अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान होने के लिए तैयार किया और उन्हें नए कपड़े पहनाकर घर से दूर ले गए रास्ते में हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम को शैतान ने भड़काने की कोशिश की और शैतान ने बताया इसमाइल तुझे मालूम है कि तुम्हारे पिता तुम्हें क्यों लेकर जा रहे हैं वह तुम्हें खुदा की राह में कुर्बान करना चाहते हैं तुम घर वापस चले जाओ हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने कहा शैतान तू दूर भाग जा मेरे पिता खुदा की राह में मेरी कुर्बानी देना चाहते हैं तो मैं खुदा की राह में कुर्बान होने के लिए तैयार हूं इस तरह घने जंगल में हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल अलैहिस्सलाम को लेकर गए और खुदा की राह में हजरत इस्माइल को कुर्बान करने लगे तो खुदा को उनकी यह अदा बहुत पसंद आ गई और खुदा ने आसमान से एक दुमबा भेजा जिसे आज के दौर में बकरा कहते हैं और हुक्म हुआ की इब्राहिम मुझे तुम्हारी यह अदा बहुत पसंद आई तुम अपने बेटे इस्माईल अलैहिस्सलाम की जगह इस दुमबे की कुर्बानी दे दो तब से लेकर आज तक हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की याद के तौर पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है
💚सदा हंसते रहो जैसे हंसते हैं फूल,
दुनिया के सारे गम तुम जाओ भूल,
चारों तरफ फैलाओ खुशियों के गीत,
इसी उम्मीद के साथ तुम्हें मुबारक हो बकरीद 💚








