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रायपुर।

देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाईस चेयरमेन श्री अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन श्री जितेन्द्र दोशी, श्री विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन श्री सुरिन्दर सिंह, श्री जीवत बजाज, महामंत्री श्री अवनीत सिंह, कोषाध्यक्ष श्री विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेंद्र जग्गी, श्री वासु माखीजा, श्री राम मंधान, श्री भरत जैन, श्री राकेश ओचवानी एवं श्री शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि आरबीआई का रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय देश के व्यापार, उद्योग, एमएसएमई क्षेत्र एवं समग्र अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

श्री पारवानी ने कहा कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से ऋण की लागत में तत्काल वृद्धि नहीं होगी तथा गृह ऋण, वाहन ऋण एवं व्यावसायिक ऋण की ईएमआई पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, निवेश का माहौल मजबूत होगा तथा उद्योग एवं व्यापार जगत को अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।

उन्होंने कहा कि आरबीआई द्वारा पॉलिसी स्टांस को “न्यूट्रल” बनाए रखना यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई और विकास दर के अनुसार भविष्य में आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह नीति आरबीआई को बदलती वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने का लचीलापन प्रदान करती है।

श्री पारवानी ने कहा कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 3 प्रतिशत पर यथावत रखना भी महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनी रहेगी तथा व्यापार, उद्योग, एमएसएमई और उपभोक्ताओं को ऋण की उपलब्धता सुचारू रूप से जारी रहेगी। यह कदम आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय रुपये को मजबूती प्रदान करने तथा विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आरबीआई द्वारा घोषित उपायों का विशेष स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों एवं एनआरआई निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदमों से भारत में पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा भारतीय रुपये को भी मजबूती मिलेगी। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

 

श्री पारवानी ने कहा कि आरबीआई द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत किया जाना वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का यथार्थवादी आकलन है। इसके बावजूद भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश तथा बुनियादी ढांचे का विस्तार विकास को निरंतर गति प्रदान करेंगे।

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति (Inflation) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत करना यह दर्शाता है कि आरबीआई महंगाई पर लगातार नजर बनाए हुए है और मूल्य स्थिरता को लेकर पूरी तरह सजग है। महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी केंद्रीय बैंक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है और आरबीआई इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

श्री पारवानी ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर एवं मौद्रिक नीति समिति को बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान मौद्रिक नीति भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति आरबीआई के विश्वास को दर्शाती है। स्थिर ब्याज दरें, पर्याप्त तरलता, रुपये को मजबूत करने के प्रयास, निवेश को प्रोत्साहन तथा महंगाई पर सतत निगरानी जैसे कदम देश की आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक विकास को मजबूती प्रदान करेंगे।

उन्होंने कहा कि व्यापारिक समुदाय को विश्वास है कि आरबीआई भविष्य में भी ऐसे निर्णय लेता रहेगा जो आर्थिक विकास, निवेश, रोजगार सृजन तथा व्यापारिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करेंगे। आज की मौद्रिक नीति यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी विकास की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।

 

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