’’मैक में एक दिवसीय इंटरनेशनल सेमीनार का आयोजन’’
रायपुर
महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (मैक), समता कॉलोनी रायपुर में आज दिनांक 06.05.2013 “The Six Paramitas to Succeed” विषय पर एक दिवसीय इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन के के मोदी यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।
इंटरनेशनल सेमिनार मे मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. क्रिस्टी चाॅंग (ग्लोबल एजुकेटर इंटरफेथ एक्टिविस्ट एंड पीस सिंगर), एवं डॉक्टर फ्रैंक यूं फ्रू टेन (चाइनीस विजडम रिसर्चर) उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में केके मोदी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार आदरणीय डाॅ. डी. एन. सिंग थे। आदरणीय प्राचार्य महोदय के द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का सफलता पूर्वक आयोजन महाविद्यालय के चेयरमैन आदरणीय श्री राजेष अग्रवाल जी प्राचार्य डॉ. एम. एस. मिश्रा एवं एडमिनिस्ट्रेटर सिद्धार्थ सभरवाल के मार्गदर्शन किया गया।
बौद्ध धर्म के अनुयायी आज पूरे विश्व में है। भगवान बुद्ध के संदेश मानव मात्र के लिए हमेशा से ही प्रासंगिक रहे हैं। उत्तम जीवन के लिए उन्होंने आश्टंगिक मार्ग पर जोर दिया है जिनके अनुपालन से प्रत्येक व्यक्ति मानव से महा मानवता को प्राप्त कर सकता है। सेमिनार की प्रमुख वक्ता डॉ. क्रिस्टी चाॅंग ने भगवान बुद्ध के 6 परमीता को सफलता के मूल मंत्र के रूप में बहुत सुंदर एवं उत्कृष्टता के साथ समझाया बेहद ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक वक्तव्य में डॉ. क्रिस्टी चाॅंग ने 6 परमीता को समझाया उसमें प्रमुख रूप में दान, षील, षान्ति, ध्यान परमीता, वीर्य परमीता एवं प्रज्ञा परमिता पर अपना उद्बोधन दिया।
मुख्य वक्ता ने बेहद सौम्यता के साथ बताया कि दूसरों के हित में ही स्वयं का हित निहित होता है दान का अर्थ है बदले में कुछ भी न पाने की आकांक्षा। शील का अर्थ है तन मन एवं वचन से अहिंसा का पालन करना। धैर्य से विचलित न होना हर परिस्थिति को शांति से कम लेना ही शांति है। जीवन के प्रतिक्षण को उत्साह से जीना ऊर्जा को महसूस करना ही वीर्या परमिता है। सारी चिंताओं को छोड़कर सिर्फ वर्तमान में जीना, किसी भी कार्य को पूरी तन्मयता एवं एकाग्रता से करना ही ध्यान है, जब चित पूरी तरह से वश में आ जाए। प्रज्ञा यानी सत्य का साक्षात्कार, जब मन पूरी तरह से निर्मल हो जाता है तो प्रज्ञा की प्राप्ति होती है।
इन सिद्धांतों का पालन प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन को आनंदपूर्वक जीने के लिए करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यह एक दिन में होने वाली चीज नहीं है इसके लिए मनुष्य को हर समय प्रतिदिन बहुत अभ्यास करना होता है तभी इसमें सफलता मिलती है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. एस मिश्रा ने भी बहुत रोचकता के साथ अपने वक्तव्य में वैदिक एवम सनातन धर्म में बताए गए ज्ञान और आध्यात्मिकता को भगवान बुद्ध के संदेशों के साथ जोड़कर विस्तृत रूप से समझाया।
इस इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों मोड में किया गया था जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
एक दिवसीय इंटरनेशनल सेमिनार की इंचार्ज डॉ. श्वेता तिवारी (विभागाध्यक्ष, वाणिज्य) एवं डॉ. इला दीक्षित (प्रबंधन) थी।
