रायपुर।
भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाकर आज राजधानी में मुख्यमंत्री निवास का असफल घेराव किया जाना सिर्फ राजनैतिक रोटी सेंकने और पीएससी की छवि को खराब करने के लिए प्रदर्शन किया गया है। और भाजपा के प्रदर्शन को राज्य के युवाओं ने नकार दिया। भाजयुमो के प्रदर्शन से युवा गायब रहे भाजपा के वृद्ध नेता ही मंच पर बैठे दिखें।आज
बमुश्किल से कुछ युवा ही भाजयुमो के प्रदर्शन में पहुंचे। देश के सत्तारूढ़ दल के युवा ईकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष






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नेतृत्व के प्रदर्शन में बमुश्किल चार-पांच सौ लोग ही शामिल हुये भारतीय जनता पार्टी के पास सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है तो भारतीय जनता पार्टी ऐसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को संदिग्ध बनाने का षडयंत्र कर रही है। जिन पर प्रदेश के युवाओं को भरोसा है। राज्य लोक सेवा आयोग ऐसी संस्था है जो पढ़े लिखे युवाओं के सपनों को साकार करती है। बिना किसी ठोस आधार के अपनी दूषित कल्पना शीलता के आधार पर पीएससी जैसी संस्थाओं पर सवाल खड़ा किया जाना न सिर्फ निदनीय है आपत्तिजनक है। यह ऐसा प्रकरण है जिसमें शिकायतकर्ता कोई नहीं है सिर्फ राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक रोटी सेक रहा और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। उक्त बातें आज एक पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी सुशील आंनद शुक्ला ने कही उन्होंने भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि
अमूमन किसी भी परीक्षा में गड़बड़ियों के आधार पर यह आरोप लगते है जब
• किसी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हुये हों।
• किसी परीक्षार्थी ने लेनदेन की प्रमाणिक शिकायत किया हो।
• किसी कोचिंग संस्थान के पूर्व अनुमानित प्रश्न पत्रों के सेट से पीएससी के प्रश्न पत्र हूबहू मिल रहे थे। • मेरिट में चयनित अभ्यार्थियों के इन्टरव्यू के नंबर लिखित परीक्षा के अंको में बहुत ज्यादा असमानता नजर आ रही थी। चयन का आधार इंटरव्यू के नंबरों की अधिकता हो।
वर्तमान में राज्य लोक सेवा आयोग के परीक्षा परिणामों पर ऐसा कोई भी आरोप नहीं लगा है उसके बावजूद गड़बड़ी के मनगढ़ंत आरोप लगाना भारतीय जनता पार्टी का निम्न स्तरीय हथकंडा है। पीएससी के सफल परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिका उनकी अंकतालिका पीएससी की वेबसाईट पर सार्वजनिक है। अभ्यर्थी उसको देख सकता है किसी अभ्यर्थी ने कोई भी गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया है।
किसी मेरिट में चयनित अभ्यार्थियों के लिखित परीक्षा की अपेक्षा व्यक्तित्व परीक्षण के अचंभित करने वाले या संदेहास्पद नंबर मिले हो तो भी उसके आधार पर चयन सूची पर सवाल खड़ा किया जाये तो भी तार्किफ लगता है। लेकिन बिना किसी आधार के राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा के रिजल्ट में सवाल खड़ा किया जाना भाजपा को मानसिक और राजनैतिक दिवालियेपन को दर्शाता है राज्य के युवा इसको कदापि बर्दास्त नहीं करेंगे।
भाजपा के पास पीएससी की चयन सूची में गड़बड़ी के आरोपो का आधार क्या है? सिर्फ यही कि पीएससी में नेताओं, अधिकारियों, व्यवसायियों के बच्चो के कुछ नाम चयनित हो गये है।
जबकि परस्पर रिश्तेदारों का चयन किसी अधिकारी के रिश्तेदारों का चयन या व्यवसायी नेता के रिश्तेदारों का चयन पहली बार नहीं हुआ है और न ही यह अपराध और न ही किसी का रिश्तेदार होना अयोग्यता का पैमाना हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी के समय भी 2004 से 2021 तक भी परस्पर संबंधियो के चयन होते रहे है। हम इसकी सूची सार्वजनिक कर चुके हैं।
भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पीएससी ने सबूत मिटाने उत्तर पुस्तिकाओं को नष्ट करने निविदा मंगाया है। जबकि राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा परिणाम के दो साल तक कुछ के एक साल तक उत्तर पुस्तिका सुरक्षित रखता वर्तमान में भी जो निविदा मंगाया है वह 2020 तक की है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। भाजपा के नेता बिना तथ्यों के आरोप लगा कर भ्रम फैला रहे है।
इस प्रदेश में भाजपा के 15 सालों में मात्र 9 परीक्षाये आयोजित हुई थी। रमन राज में पीएससी में गड़बड़ी के प्रमाणित आरोप लगे ये तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष अशोक दरबारी को राज्यपाल ने सस्पेंड किया था। तत्कालीन पीएससी के कार्यवाहक अध्यक्ष खेलनसाय जांगड़े की पुत्री का चयन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुआ
हमने उस पर सवाल नहीं खड़ा किया क्योकि रिश्तेदार होना गड़बड़ी का आधार नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट कहा है कि यदि पीएससी के चयन सूची में गड़बड़ी के कोई भी ठोस साक्ष्य है तो उसको सामने लाये जांच की जायेगी कड़ी कार्यवाही की जायेगी। अपने राजनैतिक उद्देश्यों की के लिये राज्य लोक सेवा आयोग पर सवाल किया जाना सर्वथा अस्वीकार्य है।
