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कैट ने पीयूष गोयल को पत्र भेजकर ई कॉमर्स नियमों में कोई भी ढील न दिए जाने की मांग की

Purushottam Manhare January 2, 2022

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू, अमर गिदवानी, प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी संजय चौंबे ने बताया कि कनफेडेरशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) ने आज वाणिज्य उपभोक्ता मामलों के मंत्री  पीयूष गोयल को एक पत्र भेजकर भारत में ई-कॉमर्स व्यापार को सुव्यवस्थित करने से संबंधित तीन सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत पहलुओं जिनमें उपभोक्ता क़ानून के अंतर्गत ई कॉमर्स नियम, ई कॉमर्स नीति एवं ई कॉमर्स में एफडीआई नीति पर एक नए प्रेस नोट की और दिलाते हुए कहा की यदि इनमें से किसी भी नियम में कोई ढील दी जाती है तो देश भर में यह मानना जाएगा की सरकार पर विदेशी ई कॉमर्स कंपनियों का पूरा दबाव है जिसका सन्देश व्यापारी वर्ग में अच्छा नहीं जाएगा ! देश भर में व्यापारी विदेशी ई-कॉमर्स के हाथों पहले ही बहुत उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।व्यापारिक समुदाय कई वैश्विक ई-कॉमर्स दिग्गजों द्वारा कानूनों और नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन और संबंधित एजेंसियों को उनके खिलाफ कार्यवाही करने में पूरी तरह से सरकार द्वारा अब तक कोई कदम न उठाये जाने से बेहद नाराज है !

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी और प्रदेश अध्यक्ष  जितेन्द्र दोशी ने कहा की यह अत्यंत खेद की बात है कि दो साल से अधिक समय से विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कई बार श्री पीयूष गोयल की सख्त और स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद ई कॉमर्स कंपनियां ठीक सरकार की नाक के नीचे नियमों एवं कानूनों का खुला उल्लंघन कर रही है जिसने एक तरह से देश के ई कॉमर्स व्यापार में “माई वे या हाईवे” जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि देश भर के व्यापारियों का स्पष्ट मत है की उपभोक्ता क़ानून के तहत प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियमों में किसी भी तरह के कमजोर पड़ने से देश भर में एक ये संदेश जायगा की सरकार कुछ छिपे हुए दबावों के आगे झुक गई है और ई-कॉमर्स परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर तोड़ मरोड़ कर विदेशी कंपनियों को मनमानी करने के लिए परोस दिया गया है। ऐसी कोई भी ढील देश के लोगों को भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत व्यापार की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के विपरीत है ।

श्री पारवानी एवं श्री दोशी ने कहा की कुछ लोगों तथा बेहद सीमित सरकारी एजेंसियों का यह कहना कि इन नियमों में किसी भी प्रकार की सख्ती किये जाने से भारत में विदेशी निवेश के प्रवेश की संभावनाएं ख़राब होंगी, बिलकुल गलत है। ई-कॉमर्स के माध्यम से कोई भी एफडीआई भारत में प्रवेश नहीं कर रहा है, बल्कि एफडीआई की आड़ में आने वाले पैसे का इस्तेमाल ई कॉमर्स कंपनियां कैश बर्निंग या उनके द्वारा किये गए भारी नुकसान की भरपाई करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा की भारत में ई-कॉमर्स लोकतंत्र से बिल्कुल भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि 2019 में सार्वजनिक डोमेन में रखे गए ई-कॉमर्स नियमों के मसौदे पर व्यापक विचार-विमर्श और बहस हुई है, जिसके दौरान कुछ सरकारी एजेंसियों ने विशुद्ध रूप से उक्त नियमों में शामिल कुछ खंडों पर आपत्तियां जताई है जो केवल तकनीकी है । हालांकि व्यापारी इस तरह के विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते है लेकिन फिर भी कैट का आग्रह है की ई-कॉमर्स नियमों के मसौदे में परिकल्पित ऐसे प्रावधान को सम्मिलित करने के बाद से या तो ई-कॉमर्स नियमों में या ई-कॉमर्स नीति में या एफडीआई नीति में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। भारत में समान स्तर का ई-कॉमर्स व्यवसाय प्रदान करने के लिए ई-कॉमर्स को एक समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ।

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि अब यह स्पष्ट है कि कई विदेशी वित्त पोषित ई-कॉमर्स कंपनियां अपने व्यवसाय प्रथाओं में लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना , गहरी छूट, हानि वित्तपोषण, एक्सक्लूसिविटी ,इन्वेंट्री का मालिक होना और तरजीही विक्रेता प्रणाली को खुले रूप से अपनाये हुए हैं ! देश में ई कॉमर्स कंपनियां गांजा जैसे निषिद्ध सामानों की बिक्री की सुविधा प्रदान करती हैं, जिसे हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस ने पकड़ा है, आतंकी हमलों में बम बनाने के लिए विस्फोटक सामान ई कॉमर्स कम्पनी के जरिये मंगाना, जैसा कि पुलवामा हमले में इस्तेमाल किए गए बमों के मामले में किया गया था, जिनके दोषियों को एनआईए ने मार्च, 2020 में गिरफ्तार किया था, जैसे कथित अपराध किये जा रहे हैं और अभी तक एक भी संबंधित ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सरकार ने कार्यवाही नही की है।

श्री पारवानी एवं श्री दोशी ने कहा कि कैट का स्पष्ट मत है कि भारी छूट और फ्लैश बिक्री पर रोक लगाने वाले प्रावधान, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस को उनके प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले सामान की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार बनाना, ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना, बाजार-विकृतियों को रोकना , माल और सेवाओं की गलत बिक्री, उनके प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सभी विक्रेताओं के साथ समान व्यवहार और वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री के लिए विक्रेताओं का चयन करने की स्वतंत्रता वाली गतिविधियों पर रोक लगाने हेतु नियमों एवं नीति में शामिल करना बेहद जरूरी है अन्यथा फिर किसी भी नियम एवं नीति का कोई महत्व ही नहीं रह जाएगा !

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा की कैट व्यापारियों के लिए किसी विशेष उपकार के लिए आग्रह नहीं कर रहा हैं बल्कि देश के नियमों एवं कानूनों का अवश्य पालन किये जाने हेतु जोर दे रहा है जिससे देश के घरेलू व्यापारियों को “डिजिटल इंडिया” के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुसार ई-कॉमर्स को बड़े पैमाने पर अपनाने की सुविधा मिले ! यदि ई कॉमर्स को समान स्तर का व्यापार करने का मौका नहीं दिया जाता है तो देश के व्यापारियों को ई-कॉमर्स कंपनियों के जोड़-तोड़ और अनैतिक व्यवसाय प्रथाओं के कारण चरणबद्ध तरीके से अपने व्यवसाय को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कैट को यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ऐसी मंशा नहीं होगी !

 

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