जिला प्रशासन एवं मित्तल स्टील्स ने सांठ गांठ कर अपशिष्ट पदार्थ को करली पंचायत में डालने का मामला थमता नजर नहीं रहा है । ग्राम पंचायत कारली मामले में अब छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को एक खत लिख कर शिकायत किया गया है । ज्ञात हो कि पूरा मामला आर्सेलर मित्तल किरंदुल का है जिसमे जिला प्रशासन ने बिना ग्राम सभा करवाये ही कारली पंचायत में अपशिष्ट पदार्थ, “कथित लाल ज़हर” को पंचायत भूमि अंतर्गत नवीं वाहिनी की भूमि में डालने की अनुमति दे दी थी ।
अब जब जिला प्रशासन ने कारली पंचायत के ग्रामीणों की बात एवं विरोध प्रदर्शन को भी नज़र।अंदाज़ कर दिया तो मजबूरन सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी नेता सुजीत कर्मा को राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखनी पड़ी । साथ ही पुलिस प्रशासन पर उनके संरक्षण में कार्य करवाने का भी आरोप लगाया है । ज्ञात हो कि इस कार्य के विरोध में ग्रामीणों ने कंपनी के गाड़ियों को अपशिष्ट पदार्थ डालने से रोकने हेतु चक्काजाम भी किया था और फिर इस के बाद कुछ दिन कार्य बंद कर दिया गया था । परन्तु कुछ दिन कार्य बंद करने के बाद फिर से इस कार्य को चालू करने से ग्रामीणों,समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। ग्रामीणों अपना पक्ष रखते हुए कहा था के जिला प्रशासन पंचायत से ही मिट्टी खोद कर करे समतलीकरण इस अपशिष्ट से नही ।पहले ग्राम सभा की जाए फिर कार्य शुरू करे ।

इस मामले में जब ग्रामीणों के पक्ष में सर्व बस्तरिया मूल आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ विरोध प्रदर्शन किया था तो उन्हें पुलिस थाने से कारण बताओ नोटिस तक जारी कर दिया था और मात्र आधे पहर का वक़्त दिया गया था जवाब देने के लिए । जिससे ग्रामीणों द्वारा सीधा कलेक्टर दीपक सोनी पर आरोप लगाए गए थे कि यह सारा कार्य एक व्यक्ति विशेष को फायदा पहुँचाने के लिए किया जा रहा है ।इसी प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों से दंतेवाड़ा के मुक्ति धाम के पास समतलीकरण कार्य चल रहा था जिस पर हाई कोर्ट में एक पिटीशन भी दायर की गई थी जिस पर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पर्यावरण विभाग को शिकायत कर्ता के शिकायत का निराकरण का आदेश दिया है ।






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