एस एच अज़हर दंतेवाड़ा किरंदुल नगर की सड़कें रोशनी के मामले में दोहरे मापदंड की शिकार नजर आ रही हैं। नगर पालिका और एनएमडीसी के सहयोग से वर्षों से बंद पड़ी झालर लाइट्स को तिरंगे रंगों में चालू कर दिया गया है, लेकिन यह सुविधा सिर्फ चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित है।
रिंग रोड नंबर 4 पर पेट्रोल पंप से बीटीओए भवन तक का पूरा हिस्सा गहन अंधकार में डूबा हुआ है। चार नंबर इलाके में भी यही स्थिति है। भारी 10 चक्का व 14 चक्का वाहनों की पार्किंग के कारण रात के समय राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस ओर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया।
वहीं बस स्टैंड से लेकर लक्ष्मणपुर कैंप तक तिरंगे रंग की आकर्षक झालर लाइट्स जल रही हैं, जो पूरे इलाके को भव्य बना रही हैं। लेकिन बंगाली कैंप, सुभाष चंद्र बोस चौक और चार नंबर क्षेत्र के निवासी इस सुंदरता से वंचित हैं।
निवासियों का सवाल:
क्या बंगाली कैंप, चार नंबर और रिंग रोड-4 के निवासी कम हकदार हैं? तिरंगे की गरिमा और सुरक्षा की रोशनी का लाभ पूरे नगर को समान रूप से क्यों नहीं मिल रहा? यह सौतेला व्यवहार क्यों?
स्थानीय लोगों ने नगर पालिका और एनएमडीसी प्रशासन से अपील की है कि पूरे किरंदुल में रोशनी की समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। खासकर रिंग रोड नंबर 4 और आसपास के अंधेरे इलाकों में तुरंत स्ट्रीट लाइट्स व सजावटी लाइट्स चालू की जाएं, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों को समान विकास का अनुभव हो।
