अंबिकापुर ।अम्बिकापुर शहर की यातायात व्यवस्था इतनी बिगड़ चुकी है कि अब सड़को पर चलना मुश्किल हो गया है।सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कैट के प्रदेश मंत्री व चैम्बर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी जिलाध्यक्ष समाजसेवी शुभम अग्रवाल ने शहर की यातायात पुलिसिंग को फैल का करार दिया है।शुभम ने बताया कि अनेकों बार यातायात पुलिस को सुझाव दिए गए मगर वन वे के अलावा पुलिस अन्य किसी सुझाव पर ध्यान ही नही देती सिर्फ ट्रैफिक आरक्षकों की भर्ती में कमी का हवाला देती हुई नजर आती है।कुछ वर्षों पूर्व पेट्रोलिंग के लिए बाइक व चार चक्का गाड़ी जिसमे सायरन में माईक लगा हुआ था की खरीदी की गई थी मगर शहर में महीनों से सिर्फ एक चार चक्का गाड़ी नज़र आ रही है।बाइक व अन्य चार चक्का गाड़ी का पता ही नही की रखे रखे कबाड़ हो गयी या भ्र्ष्टाचार की भेंट चढ़ गई।यातायात में अन्य पदों पर अधिकारी व आरक्षकों की भर्ती कर कमी को दूर करने की कोशिश की जानी चाहिए मगर शहर में ट्रैफिक सुस्त नज़र आ रहा है।शुभम अग्रवाल ने मीडिया के माध्यम से कुछ आरोप लगाए हैं तो कुछ सुझाव भी दिए हैं।
बेतरकीब ढंग से खड़ी गाड़ियाँ:-






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शुभम ने बताया कि बीच सड़क पर लोग गाड़ी खड़ी कर या तो चले जाते हैं ये ट्रैफिक का तमाशा देखते हैं।यातायात की गाड़ी में बैठा आरक्षक एक बार गाड़ी बढ़ाने की बोल कर चला जाता है।जिससे सड़क पर गाड़ी खड़ी करने वालों के हौसले बुलंद रहते हैं।पहले आरक्षक या अधिकारी गाड़ी हटवाकर ही आगे बढ़ता था व कुछ ही देर में दुबारा उस सड़क पर पहुचने पर गाड़ी मिलती थी तो कार्यवाही की जाती थी।
अम्बिकापुर में बाइक से ही सम्भव पेट्रोलिंग:-
शुभम अग्रवाल ने सुझाव दिया है कि शहर में फिर से पेट्रोलिंग बाइक निकली जाए व उसी से पेट्रोलिंग करवाई जाए।प्रत्येक बाइक में आरक्षक को सिर्फ 2 या 3 मुख्य सड़कों का ही जिम्मा दिया जाए।
वन वे से व्यापार ध्वस्त व बाहरी परेशान:-
शुभम ने बताया कि वन वे करने का कोई औचित्य नही नज़र आता।वन वे करने से अंदरूनी सकरी सड़क पर भारी जाम हो जाता है जहाँ ट्रैफिक जवान कभी नही पहुँचते।साथ ही वन वे होने से एक तरफ की दुकानों में ग्राहक नही पहुँच पाते।साथ ही जो लोग शहर के बाहर से शहर में आते हैं वो डायवर्सन की वजह से भटक जाते हैं।
ड्यूटी स्थल पर भारी वाहन देखते ही ड्यूटी छोड़ उनके पीछे जाना:-
शुभम ने आरोप लगाया है कि ट्रैफिक जवान ड्यूटी स्थल छोड़ भारी वाहनों की तलाश में उनके पीछे दूर तक चले जाते हैं।जिससे उनके ड्यूटी स्थान पर जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।
ददन पाठक साहब की आवाज़ आज याद आती है:-
शुभम अग्रवाल बताते हैं कि पूर्व में यातायात के ददन पाठक हुआ करते थे उनकी बुलंद आवाज़ मात्र से ही गाड़ी मालिक मुस्कुराते हुए गाड़ी हटा लेते थे।पब्लिक में डर भी था व इज्जत भी।उनके रहते हुए जो पेट्रोलिंग हुई उसके बाद वैसी पेट्रोलिंग एक दो बार ही देखने मिली है।
जहाँ एक कि जरूरत वहाँ तीन की तैनाती:-
शुभम ने बताया कि सिग्नल वाली जगह में एक या दो जवान की ड्यूटी से भी काम चल जाएगा मगर वहाँ पर 3-5 जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है।व कही कही पर जहाँ जवान की अत्यधिक आवश्यकता है वहाँ ड्यूटी ही नही लगती।
पार्किंग की घोषणा,पालन नही:-
जब भी शहर में यातायात को लेकर हो हल्ला होता है तो शहर के विभिन्न हिस्सों को पार्किंग के तौर में घोषित किया जाता है मगर उसका पालन नही करवाया जाता।पार्किंग में गाड़ी खड़ी करवाने पहल जरूरी।
