रायपुर । कर्मचारी संघ ने दिसंबर 21 में कर्मचारी मांगों को पूरा कराने ज्ञापन दिया था, लेकिन जनवरी में राज्य शासन द्वारा ओमीक्रोन कोरोना वायरस के चलते धरना, प्रदर्शन, हड़ताल पर रोक लगा दिया गया था। 22 दिनों के बाद कार्यालय खुलने पर कुलसचिव से समीक्षा बैठक रखने की मांग की गई थी ,लेकिन कुलसचिव ने 1 फरवरी 22 को कर्मचारी संगठनों को निलंबित कर दिया था । कर्मचारी संघ ने समय का सदुपयोग करते हुए कर्मचारी मितव्ययिता सहकारी समिति का चुनाव कराने में लग गए थे। 2 माह बाद संघ के आग्रह करने पर संगठनों को बहाली किया गया। संघ ने फिर समीक्षा बैठक बुलाने के लिए आग्रह किया, लेकिन कुलसचिव ने अस्वीकार कर दिया एवं व्यक्तिगत समस्याओं के निराकरण कराने के लिए ,,परस्पर संवाद कार्यक्रम,,19 अप्रैल एवं 22 अप्रैल को रखा , इसमें भी किसी भी कर्मचारी के व्यक्तिगत समस्याओ का वि, वि, द्वारा निराकरण नहीं किया गया। अंत में विवश होकर संघ ने कर्मचारी मांगों को पूरा कराने के लिए 2011 की तर्ज पर 17 मई 22 से अनिश्चितकालीन हड़ताल किया, जिसे 16 दिन बाद लिखित आश्वासन पर स्थगित किया गया है । संघ ने लिखित आश्वासन में विश्वविद्यालय प्रशासन जिन मांगों को राजभवन अथवा राज्य शासन के स्तर का मानता है , ऐसी मांगो को पूरा कराने के लिए राजभवन एवं राज्य शासन को भेजे गए पत्रों की प्रति संघ को उपलब्ध कराए जाने का आग्रह किया गया था। संघ ने पुनः दिनांक
6 जून 2022 को व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होकर शासन को भेजे गए पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराने का स्मरण कराया , जिससे राज भवन एवं राज्य शासन स्तर पर संबंधित अधिकारियों से मिलकर मांगों को पूरा कराने का प्रयास किया जा सके। संघ ने 18 जून को कुलसचिव से मिलकर जानकारी दिया कि उनके निर्देश पर संघ को दो पत्र 9 जून 2022 को प्राप्त हुआ है , जिसमें संबंधित आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर नहीं दिए जाने से जानकारी अधूरा है एवं तीसरे पत्र की प्रति अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है । संघ के अध्यक्ष श्रवण सिंह ठाकुर एवं सचिव प्रदीप कुमार मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालय तीन मांगों को
पूरा कराने में असमर्थ है जिसमें पहला ,,,
कार्य परिषद में एक कर्मचारी प्रतिनिधि को शामिल करना
दूसरा,,,, कर्मचारियों के बच्चों के शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति राशि 4000/ रुपए को बढ़ाकर 10000/ रुपए वृद्धि करना एवं तीसरा,,,, वाहन भत्ता की राशि को वापस कराने की मांग को राज्य शासन स्तर का मानता है। विश्वविद्यालय द्वारा शासन को भेजे जाने वाले पत्र की प्रति मिलते ही राज भवन एवं राज्य शासन स्तर की मांगों को पूरा कराने का प्रयास करेगा ।








