रायपुर। ज्ञानियों शांति अलग है,मजा अलग है और आनंद अलग है। मित्रों मजा तो आपको टीवी देखने से भी आ सकता है लेकिन आनंद तो वीतरागता में ही आता है। आप आनंद की ओर दौड़ना। आनंद अहिंसा है क्योंकि आनंद में क्लेष, संक्लेषता,द्वेष,राग नहीं होता। आज से प्रयास करो कि कोई काम न हो, काम करने का मन नहीं करें, बस आनंद में रहने का प्रयास करो। योगीश्वर विषयों से बचने के लिए तपस्या करते हैं और ध्यान में लीन होकर आनंद लेते हैं। विश्वास मानो मोक्ष आनंद से ही होगा, ज्ञानियों दुनिया में सम्मान और मजा खूब है लेकिन आनंद वीतरागता में ही है। यह संदेश सन्मति नगर फाफाडीह में मंगलवार को आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने धर्मसभा में दिया।
आचार्यश्री ने कहा कि जहां आनंद है,प्रसन्नता और खुशी है, वह स्थान ज्ञानियों पंच परम गुरु के चरण हैं। संसार में जब व्यक्ति परिपूर्ण रूप से थक चुका होता है,संपूर्ण आश्रव समाप्त हो जाते हैं,तब वह परमात्मा के आश्रव पर लग जाता है। यही कारण है कि आज जो व्यक्ति आस्था और विश्वास से भरा होता है, फिर उसको दुनिया में कोई दिखाई नहीं देता है। संसार में आकांक्षाए आस्था को जन्म देती है और आस्था आकांक्षा को विराम दे देती है।






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आचार्यश्री ने कहा कि कार्य करना कठिन नहीं है, कार्य का निर्णय लेना कठिन है। कार्य किसी का कठिन नहीं होता,कार्य का निर्णय कठिन होता है। चाहे जज हो, वकील हो इनको पैसे कार्य के लिए नहीं निर्णय लेने के लिए मिलते हैं, हर व्यक्ति को वकील की आवश्यकता पड़ जाती है, मात्र बात करने और बात रखने के लिए पैसे मिलते हैं। ज्ञानियों जिसको बनी बात मिल जाती है, उसकी बात बिगड़ती नहीं है। विकास चाहिए तो यदि आपके गुरु भाई भी आप से सलाह मांगे तो एक ही सलाह देना “गुरु बुद्धि विशेषता” जिन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया है उनको मैंने गिरते भी देखा है,अपने स्वयं के नियम बनाते हैं उनको टपकते देखा है, इसलिए जो परम गुरु अरहंत देव तीर्थंकर देव ने कहा है वह मुझे स्वीकार करना है,जो सच्चा गुरु होगा वह परम गुरु तीर्थंकर की बात ही बताएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि अर्हत दर्शन कहता है आनंद के साथ जियो,आनंद का जीवन ही अहिंसा है,यही रसायन है, इस पर आपको सोचना पड़ेगा,इस पर चिंतन करना चाहिए। मजा आजीवन हिंसा है एवं रसायन शास्त्र कह रहा है कि आनंद का जीवन ही अहिंसा है। जहां तुम जी रहे हो यदि आनंद होता तो आप मंदिर कभी नहीं आते, गुरुओं के पास नहीं आते,बाघेश्वरी जिन भारती जिनवाणी के पास कभी नहीं आते,इसलिए आनंद और मजा में अंतर समझिए। आप दिनभर मजा लूट सकते हो लेकिन आनंद कभी एक क्षण ही मिलता है।
आचार्यश्री ने कहा कि विषयों और कषायों में मजा मिल सकता है लेकिन आनंद नहीं मिलता है। विषय कषाय के मजे में अंत में पश्चाताप होता है,अश्रुपात व अपयश होता है। मित्रों मजे में जीने वालों का कोई दर्शन करने नहीं आता, जो आनंद में जीता है उसका दुनिया दर्शन करने आती है,आनंद का जीवन जीना सीखो दुनिया दर्शन करने आएगी। सहज चातुर्मास हो गया, सहज पंचकल्याणक महामहोत्सव प्रारंभ हो चुका है और पूर्ण हो जाएगा, सहज दीक्षाएं हो जाएंगी, सहज विहार हो जाएगा, उस आनंद को समझिए ज्ञानियों, आप पंचकल्याणक कर रहे हो तो मित्रो मजा आ रहा है कि आनंद आ रहा है? पंडित जी यहां मजा लेने आए हैं या आनंद लेने आए हैं? मित्रों मजा तो मदारी के यहां भी मिल सकता है, साधु के यहां मजा नहीं आनंद मिलता है,आप साधुओं के पास आनंद लेने ही आना।
आचार्यश्री ने कहा कि जिस सुख में द्वंद नहीं होता उसका नाम आनंद है, जिस सुख में आग नहीं जलती,ज्वालाए नहीं भड़कती उसका का नाम आनंद है,पांच इंद्रिय सुखों का अभाव होता है और सुख मिलता है उसका नाम आनंद है,कर्म ईंधन को जो जला दे उसका नाम आनंद है और जो कर्म इकट्ठे करा दे उसका नाम मजा है। हमेशा ध्यान रखना अच्छा खाओगे तो आपका पेट भरता है और लोक में यश मिलता है। अच्छा खाने वालों को यश तो मिलता ही,पेट भी भरता है, शरीर स्वस्थ होता है,धर्म भी पलता है। उल्टा सीधा खाने वालों का शरीर खराब होता है,अपयश मिलता है।

आचार्यश्री ने कहा कि विश्वास मानो यदि किसी के यहां भोजन करने गए और बोल दिया कि रात में रोटी नहीं खाता हूं तो आपको मलाई मिलेगी और यह बोल दिया कि मैं मलाई भी नहीं खाता, चारों प्रकार के आहार पानी का त्याग है तो विश्वास मानो लोक पूज्य धर्म का सम्मान मिलेगा। शुद्ध भोजन करने वाले को शुद्ध सम्मान मिलता है। यही तो सीखना है, लोग सोचते हैं काम चलेगा, अरे मित्र काम चलेगा शब्द आते ही सम्मान चले जाता है। शुद्ध खाना कितना सरल है, शुद्ध खाने के लिए आपको सोचना पड़ता है तो शुद्ध भावों के लिए कितना सोचना पड़ेगा ? जितने लोगों ने मेरी बात मान ली है उनको भजन करके भोजन मिलता है, अन्यथा संसार में तो लोगों को किलकिल करके खाना पड़ता है।

आचार्यश्री ने कहा कि जानिए श्रावक एक रोटी लेकर कैसे आता है ? व्यवस्था नहीं है तो एक रोटी बहुत कठिन होती है, पुण्य क्षीण को एक रोटी का मिलना स्वर्ग जैसा होता है, पुण्य आत्मा को स्वर्ग का मिलना एक रोटी जैसा होता है। जो शुद्ध भोजन करता है उसको ऊंचाइयां मिलती है, जो केवल यह सोचते हैं कि लोग परेशान होंगे हमारे पीछे, जो आ जाए वही खा लूंगा, विश्वास रखो आप उसी दिन सामान्य हो जाओगे।
*भगवान का जन्म होने के बाद भक्तों ने 108 कलशों से पांडुकशिला पर किया जन्माभिषेक*
प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ शास्त्री ने बताया कि मंगलवार मध्य रात्रि में भगवान की माता मरुदेवी की गर्भ शोधन की क्रियाएं संपन्न हुई, जिसमें सभी विशेष इंद्रों ने उक्त क्रिया को निहारकर एवं संपन्न कर अपने जीवन को धन्य किया। यह सभी कल्याणकों की क्रियाएं चूड़ीलाइन दिगंबर जैन मंदिर में भी संपन्न हो रही है। मंगलवार सुबह 6 बजे से भगवान का अभिषेक,शांतिधारा,गर्भ कल्याणक पूजन एवं भगवान के जन्म की खुशियां बड़े हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। दोपहर 1 बाजे गाजे के साथ सुमेरु पर्वत की पांडुकशिला पर भगवान का 108 कलशों से जन्माभिषेक हुआ,इसके पश्चात आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने धर्मसभा में अपनी मंगल देशना से आशीर्वाद दिया। संध्या बेला में भगवान आदिनाथ की महाआरती भक्तों ने की। शास्त्र प्रवचन पंडित हरीशचंद्र शास्त्री के द्वारा किया गया,इसके पश्चात तीर्थंकर बालक का पालना एवं बाल क्रीड़ा संपन्न हुई। पंचकल्याणक महोत्सव में शामिल होकर धर्मलाभ लेने विभिन्न प्रांतों से गुरु भक्त रायपुर आए हैं। पंचकल्याणक की सभी क्रियाएं पंडित अजीत शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न कराई जा रही है।
*गुरु भक्तों ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर लिया आशीर्वाद*
कार्यक्रम संचालक अरविंद जैन ने बताया कि आज मंगलाचरण पंडित चंद्रेश जी ललितपुर ने किया। चित्र अनावरण भोजन व्यवस्था समिति के अजय पहाड़िया,प्रदीप गंगवाल, ललित रावका,राकेश गोधा, चंद्रकुमार पाटनी, मनीष पाटनी, विनय गोधा, विमल गंगवाल, प्रदीप बाकलीवाल भिलाई ने किया। दीप प्रज्वलन कुबेर इंद्र, सनत इंद्र, ईशान इंद्र, महायज्ञ नायक, यज्ञ नायक ,देवेंद्र शाह भोपाल, सजल काला दुर्ग, सौरभ छाबड़ा, राजकुमार गंगवाल,संतोष पांड्या, प्रदीप पाटनी,राकेश बाकलीवाल ने किया। दुर्ग समाज से नवयुवक मंडल दुर्ग, महिला मंडल दुर्ग, चातुर्मास वर्षायोग समिति दुर्ग, महापौर धीरज बाकलीवाल, सजल काला, भरत बाकलीवाल, मनीष पाटनी वैशाली नगर, धूपचंद जी काला, ललितपुर, छिंदवाड़ा के गुरु भक्तों ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया।
