रायपुर। चाहे तुम पूर्व में जन्मे हो या पश्चिम में,चाहे उत्तर में जन्मे हो या दक्षिण में, मित्रों भगवान तभी बन पाओगे जब सदृश्य परिणाम होंगे। जब तक जीव एक सदृश्य परिणाम नहीं करेगा,जब तक अनवृत्तिकरण परिणाम नहीं करेगा, चाहे तुम किसी भी वंश में जन्मे हो, परिणाम एक सदृश्य होंगे तब जीव भगवान बनेगा। भगवान बनने की बात तो विशेष है,मित्रों आप साधु भगवंत तभी बन पाओगे जब प्राणी मात्र के लिए परिणाम आपके एक होंगे। ज्ञानियों सभी जीवों को समान देखना सीखो और समता रखना सीखो। यह संदेश आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने सन्मति नगर फाफाडीह में गुरुवार को दिया।
धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि पुण्य-पाप के खिलौने भिन्न-भिन्न हो सकते हैं,मटकी की ऊंची-नीची आकृति हो सकती है, पर ज्ञानियों मिट्टी सबकी एक है। ऐसे मित्र कभी यह मत सोचना कि जितने ऊंचे कद वाले हैं पहले मोक्ष जाएंगे। ज्ञानियों सत्य तो यह है न ऊंचे कद वाले मोक्ष जाएंगे, न नीचे कद वाले मोक्ष जाएंगे, मित्रों ऊंचे परिणाम वालों का मोक्ष होगा। मात्र सेठों का मोक्ष नहीं होता, मोक्ष उनको मिलता है जिनके भीतर सब कुछ निकल चुका होता है। जितने गोरे सुंदर आप दिखते हो,जितने सांवले सुंदर आप दिखते हो,मित्रों आपके मुख से शब्द भी उतने सुंदर निकलने चाहिए,जिसे सुनकर लोग आनंदित हो जाएं।






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आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में ध्यान रखना यदि किसी जीव में योग्यता है तो उस जीव का सम्मान रखना, परंतु अयोग्य व्यक्ति को बहुत ऊंचे स्थान पर मत रख देना। जीवन में हमेशा संभल कर जीना,अयोग्य पुरुष को मित्र बना कर बैठ गए तो कुछ दिन आपको बहुत अच्छा लगेगा, ज्ञानियों उसमें बुद्धि नहीं है तो आपका राज्य तो चलेगा लेकिन जिस दिन वह बुद्धिविहीन काम कर देगा तो आपके राज्य का भी काम तमाम हो जाएगा। वर्तमान में जितने बड़े-बड़े नेता हैं वे सभी गद्दी पर अवश्य हैं लेकिन बुद्धि पढ़े लिखे लोगों से ही लेते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी पास सलाहकार है,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास भी सलाहकार है,अरे ज्ञानियों आपके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पास भी सलाहकार हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि विश्वास मानिए राज्य तभी चलेगा जब राजा के पास अच्छा सलाहकार होगा। राजा अधिकार देने का स्वामी होता है लेकिन बुद्धि देने का स्वामी मंत्री व सलाहकार होते हैं। मित्रों जिसके बुद्धि देने वाले निरबुद्धि हो जाएं,उस राष्ट्र का विनाश नियत है। जिस परिवार में बुद्धिविहीन की सलाह चलती हो उस परिवार में घर के लोग दुश्मन हो जाएंगे, जिस परिवार में ज्ञानियों मुखिया के अंदर बुद्धिविहीन निर्णायक दृष्टि हो,वह अपना सर्वनाश कर लेगा। मित्रों देश,राष्ट्र व धर्म चलाना है तो बुद्धि का विकास चाहिए, बहुत प्रतिभा चाहिए। यहां तक कि आत्मा की विशुद्धि चाहिए तो बहुत प्रतिभा चाहिए। मंद व अल्प बुद्धि वाले विशुद्धि को हासिल नहीं कर सकते। यदि विराटता चाहिए तो बहुत प्रतिभा होनी चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि समाज को दुत्कारों मत,समाज ही आपको सिर पर बैठाएगी। जो अपने समूह से दूर भागता है उसका विनाश होता है, सबके साथ रहना चाहिए, पर अपने समूह का त्याग नहीं करना चाहिए। मैं सब से मिलूंगा,सबको आशीर्वाद दूंगा। भगवान महावीर स्वामी ने कहा है चींटी तो बहुत बड़ा जीव है,कुन्थु सबसे छोटा जीव है। कुन्थु से लेकर हाथी तक,मित्रों हाथी तो मध्य का जीव है,महामच्छ तक ऐसा कोई जीव न हो जो मेरी कृपा से दूर हो जाए।
आचार्यश्री ने कहा कि अपनी विवेक पूर्वक बात करने में घबराना नहीं चाहिए। जब पापी को पाप की व्याख्या में डर नहीं लगता तो हम भगवान की वाणी कहने में क्यों डरे ? डर गए तो फिर भगवान की बात कहने कौन आएगा ? यदि अरहंत देव की देशना को देते समय भी कोई मुझे घात भी करना चाहे,तो मैं खुश होऊंगा,कम से कम में अनाचार करके नहीं मरा हूं, भगवान की वाणी बोलते बोलते गया हूं। मित्रों किस बात का डर है, डरना उन्हें चाहिए जो आगम के विरुद्ध बोलते हैं,उन्हें पाप के कर्म बंध से डरना चाहिए। जो हिंसा में धर्म मानते हैं, जो छल-कपट, मायाचारी सिखा रहे हैं उन्हें डरना चाहिए, मैं क्यों डरूं ? मैं तो भगवान महावीर की दिव्य देशना सुना रहा हूं।
*विश्व की शांति के लिए गूंजा शांति मंत्र,सभी ने की आराधना*
पंडित ऋषभ शास्त्री राजिम ने बताया कि सन्मति नगर फाफाडीह में आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में चूड़ीलाइन दिगंबर जैन मंदिर के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सानंद जारी है। इसमें प्रतिदिन अनुसार गुरुवार को भी प्रातः भगवान आदिनाथ जी का अभिषेक,शांति धारा एवं पूजन विधान किया गया। आज के विधान में चौबीसों तीर्थंकर भगवान के तप कल्याणक की विशेष पूजाएं की गई। इससे यह प्रेरणा मिलती है कि अपने जीवन में तप किए बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसके पश्चात विश्व शांति यज्ञ संपन्न हुआ एवं यज्ञ के दौरान विश्व की शांति के लिए शांति मंत्र की आराधना की गई। सभी विधानों के पश्चात आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने धर्मसभा को अपनी मंगल देशना से आशीर्वाद दिया। आचार्यश्री ने कहा कि प्रभु आदिनाथ चर्या के लिए निकलने वाले हैं, जो दे पाओ देना,नहीं दे पाओ अनुमोदना करना लेकिन प्रभु की चर्या में विघ्न न आए ध्यान रखना। महामुनि की चर्या अच्छे से कराना,ज्ञानियों मुनि को आहार देने वाला नियम से मोक्ष जाता है।
*भगवान को सिर पर विराजित कर ले जाया गया आहार चर्या के लिए*
पंडित हरिश्चंद्र जी मुरैना ने बताया कि आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के पश्चात तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की आहार चर्या सानंद संपन्न हुई। ब्रह्मचारी भैया जी भगवान आदिनाथ को सिर पर विराजित कर आहार चर्या के लिए निकले। पीछे पीछे व पूरे रास्ते भर में भक्त भगवान का पड़गाहन करने अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए नतमस्तक रहे। आचार्यश्री और मुनिराजों की उपस्थिति में भगवान आदिनाथ को आहर कराया गया। पंडित जी ने बताया कि भगवान आदिनाथ का किसी पूर्व कर्मोदय के कारण 6 माह तक आहार नहीं हो पाया था,जैसे ही उस कर्म का नियोग पूर्ण हुआ,भगवान की आहार चर्या संपन्न हुई। भगवान का आहार प्रथम बार हस्तिनापुर के राजा श्रीयांस एवं राजा सोम के यहां नवधा भक्ति पूर्वक संपन्न हुआ। उपवास के बाद जब भगवान आहार को निकले तो किसी को आहार की विधि मालूम नहीं थी,इसलिए कई स्थानों पर गए परंतु आहर नहीं हुआ। अंत में हस्तिनापुर के राजा श्रीयांस के यहां गन्ना रस का आहार हुआ। आहार चर्या सुधीर बाकलीवाल फाफाडीह के निवास पर संपन्न हुई।
*सभी प्रतिमाओं पर सूरी मंत्र देकर भगवान के समवशरण में विराजित हुए आचार्यश्री*
प्रतिष्ठाचार्य पंडित अजीत शास्त्री रायपुर के निर्देशन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के सारे विधान संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार को मध्यान्ह में कैवल्य ज्ञान की अति मुख्य एवं महत्वपूर्ण क्रियाएं संपन्न हुई। जिसमें आचार्यश्री के द्वारा सभी प्रतिमाओं पर सूरी मंत्र दिया गया,जिसके बाद प्रतिमाओं में पूज्यता आई। इसके पश्चात भगवान आदिनाथ का समवशरण लगा,समवशरण में विराजमान होकर आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने मंगल देशना दी। आचार्यश्री ने भगवान के समवशरण में उपस्थित भक्तों की जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान भी किया। सारे विधान भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुए। संध्या बेला में भक्तों ने भगवान आदिनाथ की भव्य महाआरती की। इसके पश्चात शास्त्र वाचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
*राग से वैराग्य की ओर अग्रसर तीनों ब्रह्मचारी भैया जी को लगी हल्दी,निकली भव्य बिनोली*
विशुद्ध वर्षा योग समिति के अध्यक्ष प्रदीप पाटनी एवं महामंत्री राकेश बाकलीवाल ने बताया कि
राग से वैराग्य की ओर अग्रसर तीनों ब्रह्मचारी भैया जी को गुरुवार सुबह तेल, उबटन व हल्दी लगाई गई। इस शुभ अवसर का लाभ सभी भक्तों ने लिया और अपने हाथों से सभी ने हल्दी लगाई। संध्या बेला में फाफाडीह चौक से सन्मति नगर दिगंबर जैन मंदिर तक तीनों ब्रह्मचारी भैया जी को रथ में विराजित कर भव्य बिनोली निकाली गई। बाजे-गाजे रथ के साथ सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर ने उत्साह पूर्वक बिनोली में शामिल होकर धर्मलाभ लिया। मंदिरजी में बिनौली पहुंचने के बाद सामने छात्रावास परिसर में तीनों ब्रह्मचारी भैया जी की गोद भराई संपन्न हुई।
उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को दोपहर 1 से गणधर वलय विधान होगा। रात्रि 7 बजे मेहंदी रस्म और महिला संगीत होगा। 5 नवंबर शनिवार को प्रातः 11 बजे दीक्षार्थी भाइयों की आहार चर्या होगी। दोपहर 1 आचार्य संघ की पिच्छी का परिवर्तन समारोह आयोजित होगा। 6 नवंबर रविवार प्रातः 3 बजे दीक्षार्थी भाइयों की केश लोचन क्रिया व प्रातः 6:00 दीक्षार्थी भाइयों की का शाही स्नान एवं दोपहर 1 बजे दीक्षा संस्कार विधि संपन्न होगी। 7 नवंबर प्रातः 6:30 बजे मुख शुद्धि की जाएगी।
