रायपुर । बलौदा बाजार जिले के पलारी विकासखंड के संकुल समन्वयक मुकेश साहू मुझे अक्सर क्लास रूम के भीतर के वीडियोस भेजते रहते हैं। इन वीडियोस में प्राथमिक शाला छड़िया की शिक्षिका श्रीमती आराधना वर्मा द्वारा बच्चों के साथ कराई जा रही विभिन्न नवाचारी गतिविधियों के वीडियोस प्रायः मुझे देखने को मिले। मैंने इस शिक्षिका से बात की। श्रीमती आराधना वर्मा और उनके पति घनश्याम वर्मा दोनों ही शिक्षक हैं और बच्चों की पढ़ाई के बारे में निरंतर बातचीत करके सीखने के नए-नए प्रभावी तरीके खोजते रहते हैं। इन्हें कई बार बहुत सारे अलग-अलग कामों के लिए जिम्मेदारी देकर बड़े काम के लिए आमंत्रित किया गया लेकिन इन सब जिम्मेदारियों को छोड़कर इन्होंने अपनी सबसे प्रमुख जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने पर फोकस किया। दोनों अपना अधिकतम समय कक्षा के भीतर बच्चों के साथ सीखने सिखाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के लिए देते हैं। इन दोनों को बाहरी तामझाम और स्टेज आदि में प्रदर्शन और पुरस्कार लेने से कोई वास्ता नहीं है। यह अपना पूरा समय बच्चों को सिखाने में लगाते हैं। इसी को हम time on task कहते हैं। काश हमारे सारे शिक्षक इन्हीं के जैसे अपनी प्रमुख जिम्मेदारी पढ़ाने को महसूस करते और उसके प्रति संवेदनशील हो जाते तो हमारे बच्चे गुणवत्ता के क्षेत्र में बहुत आगे निकल सकते हैं । हम सबको अब आगे ऐसे ही शिक्षकों की पहचान कर उन्हें और उनके कार्यों को आगे लाना है लेकिन एक सावधानी के साथ कि ऐसे अच्छे शिक्षकों को फिर ऊपर अलग-अलग कार्यों के लिए और स्रोत शिक्षक के रूप में स्कूल से अलग न कर लिया जाए वैसे इन्हें कितना भी निर्देशित किया जाए शायद यह स्कूल से अलग होकर राज्य स्रोत व्यक्ति या अन्य किसी बड़े पद को सुशोभित करना नहीं चाहेंगे उनसे कहीं ज्यादा वह अपने बच्चों के बीच सीखने सिखाने में अपना समय देना चाहेंगे ।
