रायपुर । संस्कृति विभाग के सहयोग से मंडी की देवी मड़ई (गहिरा – मड़ई : चतुर्थ वर्ष) 2023 का आयोजन किया जाएगा ।दोहा यादवों का प्रिय छंद है। रसों में वीर रस बहुत भाता है। चंडी ताल पर लाठियाँ व तलवार लहराकर ये अपना शौर्य प्रदर्शन करते हैं। गहिरा मड़ई वस्तुतः युद्ध नृत्य है । योद्धाओं का नर्तन थे युद्ध भूमि को ऐसे ही मस्त गाते बजाते नाचते ललकारते जाया करते थे। मातर या मातृ पूजा तो पूरी तरह युद्ध आधारित त्यौहार है। गहिरा मड़ई में रास भी सम्मिलित हो गया है। राधाकृष्ण एवं गोप-गोपियों से संबंधित संयोग वियोग श्रृंगार पर आधारित दोहा के साथ सामूहिक एवं वैक्तितः चक्राकार में घुम-घूम कर छम-छम नाचना रास का ही लक्षण है। नीति निदेशक दोहे भी गहिरा मड़ई में बहुतायत में सुनाई नेता है जो हमें सदाचरण को प्रेरित करता है। ये नीति निदेशक मीठे, चुटले और गंभीर होते हैं। हमारा गहिरा मड़ई इस रास व उपदेश के सम्मिलन को स्वीकार करता है। आजकल कथात्मक नृत्य ज्यादा चलन में है
पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य। यह अत्यधिक मधुर मोहक व ज्यादातर शिक्षाप्रद विधा है। अभी-अभी चलन में आया है । गहिरा – मड़ई का यह कथात्मक नृत्य लोकप्रिय होता जा रहा है। गहिरा-मड़ई में इसका स्वागत है।
छत्तीसगढ़ सरकार से छत्तीसगढ़ कोसरिया अहीर यादव सेवा समाज यह सविनय मांग करती है कि यादव जाति के आर्थिक विकास के लिये एक ठोस कार्ययोजना शीघ्र तैयार कर चालू सत्र में ही क्रियान्वित करें। गीता अनुसंधान केन्द्र व राऊत नृत्य के आधुनिकीकरण व प्रशिक्षण शाला के लिये 20-20 करोड़ रु, अनुदान प्रदान करें।



. हमारे समाज के प्रेरणा श्रोत व पूर्व संरक्षक स्व. मा. श तेजराम कृपाण यादव गुरुजी के नाम पर गहिरा गुरु धाम के निर्माण ग्राम अछोली डोंगरगढ़ गौठान के मुख्य द्वार के पास सरकार अपने निधि से 50 लाख रुपये में निर्माण कराये।
गोपिका दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति मर्यादित दुर्ग शहरी क्षेत्र व गोपिका दुग्ध सहकारी समिति मर्यादित अछोली,डोंगरगढ़ ग्रामीण के यादव मातृ संगठन को अविलम्ब गौठान पूर्ण निर्माण कर प्रदान किया जाये।. दुग्ध पैकिंग, मठा पैकिंग मशीन के लिए 5-5 लाख रुपये मुख्यमंत्री निधि से प्रदान किया जाये। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले प्रत्येक जरुरतमंद यादव परिवार को एक जोड़ी दुधारू पशु दिया जाय ।
. सहकारिता विभाग के माध्यम से यादवों के लिये ब्लाक स्तर पर दुग्ध संघ का गठन करें।
यादव महिलाओं की बेहतरी के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार परियोजनाएं शीघ्र लागू हो।
यदि छत्तीसगढ़ सरकार हमारी उपर्युक्त मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करती है तो छत्तीसगढ़ दुग्ध एवं दुग्ध सामग्री निर्यात करने वाली भारत की सबसे बड़ी प्रांत हो सकती है। यह एक महान दुग्ध क्रांति साबित हो सकता है। प्रथम पुरस्कार – 16000 / रुपये द्वितीय पुरस्कार – 11000/- रुपये, तृतीय पुरस्कार – 7000/- रूपये
चतुर्थ पुरस्कार -5000/- रुपये, पंचम से अंतिम तक सभी गहिरा मडई व राऊत नाच दल को 3000/- नगद पुरस्कार प्रदान किया जायेगा ।
