*रायपुर।* अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् आज 6 अक्टूबर को पीएससी घोटाले के साथ-साथ प्रदेश की लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों की एक विशाल संख्या के साथ प्रदेश स्तरीय आन्दोलन करने जा रही है। इस ‘छात्र आक्रोश रैली’ के निमित्त आज यहां परिषद् के देवेन्द्र नगर स्थित प्रान्त कार्यालय में अभाविप के प्रदेश मंत्री श्री मनोज वैष्णव ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
वार्ता के दौरान प्रदेश मंत्री मनोज वैष्णव ने कहा कि सीजीपीएससी की 2021 परीक्षा में पीएससी चेयरमैन समेत कई अधिकारियों और नेताओं के बेहद करीबी रिश्तेदारों की भर्ती के बाद अब 2022 पीएससी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ी के उजागर होने से पीएससी परीक्षा के लिए दिन-रात एक कर देने वाले युवाओं को न केवल निराशा और दुःख हुआ बल्कि वे आक्रोशित भी हैं। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गड़बड़ी की आशंका को प्रथमदृष्ट्या न नकारना भी गड़बड़ी के संदेह को ही पुष्ट करता है। इससे पीएससी की विश्वसनीयता को जो अपूरणीय क्षति हुई, वह तो शोचनीय है ही। ऊपर से प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह कहना कि अबतक किसी परीक्षार्थी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई, युवाओं को उद्वेलित करने के लिए पर्याप्त है।
श्री मनोज वैष्णव ने आगे कहा कि राजधानी रायपुर समेत प्रदेश भर से आज चाकूबाजी, हत्या, लूट आदि आपराधिक मामलों के समाचारों की बाढ़-सी आ गई है। दिन ढलने के बाद लोगों को बाहर निकलने से पहले विचार करना पड़ रहा है। और एक तरफ प्रदेश सरकार है, जो अपराधियों को रोकने की बजाए उन्हें संरक्षण दे रही दे रही है, उन्हें बढ़ावा दे रही है। और-तो-और प्रदेश के गृहमंत्री ने आज तक इन अपराधों और अपराधियों के प्रति सख्त रूख दिखाना तो दूर, उनकी निन्दा तक नहीं की।






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इस प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अभाविप की प्रदेश सह मंत्री प्रमुख कु. राशि त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश में छात्राओं-महिलाओं के साथ-साथ छोटी बच्चियों के विरुद्ध बढ़ते यौन अपराधों ने उनमें असुरक्षा का भाव भर दिया है। समाचारपत्र बलात्कार, घरेलू हिंसा, हत्या आदि के समाचारों से अटे पड़े हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में लगातार विफल रही है। यदि हम आंकड़ों की ओर देखें तो पता चलता है कि NCRB की रिपोर्ट के अनुसार अकेले वर्ष 2021 में बलात्कार के 1093 केस दर्ज किए गए थे। ध्यान रहे कि यह दौर कोविड-19 की महामारी के दौर का था। इसी तरह पिछले एक साल में पॉक्सो कानून के अंतर्गत 2361 मामले दर्ज किए गए, जो निश्चित रूप से समाज के लिए चिंता का विषय है। लेकिन सरकार को इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। महिलाओं -छात्राओं बच्चियों के साथ दुष्कर्म की निरंतर बढ़ती घटनाएं सरकार के ढीले रवैए को साफ़-साफ़ दिखाती है। इतना ही क्यों, इन अपराधों की सबसे बड़ी वजह है शराब, और शराबबंदी करने का वचन देकर सत्ता की सीढ़ी चढ़ने वाले मुख्यमंत्री ने उल्टे पूरी सरकार को ही शराब बेचने में लगा दिया। महासमुन्द में घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला द्वारा अपनी बच्चियों को लेकर ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने का वाकया लोगों को अबतक याद है।
उल्लेखनीय है कि परिषद् लगातार उपर्युक्त विषयों को लेकर जांच व उचित कार्रवाई करने का आग्रह करती रही है। पीएससी मामले में भी परिषद् ने सभी जिला कलेक्टरों से लेकर मुख्यमंत्री तक और यहां तक कि राज्यपाल के समक्ष भी जांच करवाने की मांग रखी, लेकिन सरकार और मुख्यमंत्री बघेल ने इस दिशा मे कोई सार्थक कदम उठाने की बजाए, विद्यार्थी परिषद् पर इस मामले को जबरन तूल देने का बेबूनियाद आरोप लगाना मुनासिब समझा।
अतएव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् कल 6 अक्टूबर को छात्र-छात्राओं तथा पीएससी एस्पिरेंट्स समेत प्रदेश के तमाम युवावर्ग की एक विशाल संख्या के साथ छात्र आक्रोश रैली निकालकर सरकार को उसके कर्त्तव्यों की याद जरूर कराएगी।
