एस एच अज़हर दंतेवाड़ा किरंदुल सुन्नी मदीना मस्जिद में जश्ने ईद मिलादुन्नबी अदब व एहताराम के साथ मनाया गया इस मुबारक मौके पर मुस्लिम समुदाय के द्वारा जुलूस ए मोहम्मदी निकला गया इस दौरान समस्त शहर का भ्रमण कर जुलूस ए मोहम्मदी मस्जिद पहुंची और परचम कुशाई की रस्में अदा की गई और मुल्क में अमन चैन की दुआ की गई बता दे जुलूस के दौरान जगह-जगह नाश्ते का प्रबंध किया गया का सभी ने एक दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद पेश की इस दौरान सुन्नी मदीना मस्जिद के मौलाना इकबाल रजवी कारी अब्दुल गफूर हबीबी अध्यक्ष जमील खान सचिव शेख नजमुल कोसा अध्यक्ष आदिल खान महा सचिव अनवर हुसैन सह सचिव फारूक राजा सह कोषा अध्यक्ष अहमद अली ने सभी को मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी







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बता दें पैगंबर ए इस्लाम का जन्मदिवस, जिसे ईद मिलादुन्नबी या बर्थडे ऑफ प्रोफेट कहा जाता है, मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो इस्लाम के संस्थापक और अल्लाह के आखिरी पैगंबर माने जाते हैं।
इस त्योहार को मनाने के कारण इस प्रकार हैं:
. पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म की याद में: यह त्योहार पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म की याद में मनाया जाता है, जो इस्लाम के संस्थापक और अल्लाह के आखिरी पैगंबर माने जाते हैं।
मुस्लिम समुदाय पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हैं बता दे मुस्लिम समुदाय का मानना है कि उनके सबसे बड़े धर्मगुरु पैगंबर ए इस्लाम हमेशा सभी का ख्याल रखते थे और कभी भी किसी को बुरा नहीं कहा हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने हमेशा सभी की भलाई के लिए सोचा उन्होंने मुस्लिम समुदाय को संदेश दिया के पड़ोसी का खास ख्याल रखो अर्थात पड़ोसी कोई भी हो सकता है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी पड़ोसी हो सकते हैं किसी खास वर्ग का ख्याल रखना प्रोफेट मुहम्मद ने नहीं कहा कोई भी हो उसे तकलीफ कठिनाई नहीं होनी चाहिए इस्लाम मजहब कभी भी किसी दूसरे मजहब को ठेस पहुंचता नहीं है ।
एकता और भाईचारा: इस त्योहार पर मुसलमान एकता और भाईचारे का प्रदर्शन करते हैं और समुदाय के बीच सौहार्द और शांति को बढ़ावा देते हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम: इस त्योहार पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें नात, और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होते हैं।
ईद मिलादुन्नबी को मनाने का तरीका विभिन्न देशों और समुदायों में अलग-अलग हो सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करना और अल्लाह की इबादत करना है।
