Skip to content
September 7, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Vrihad Bharat

Vrihad Bharat

News Portal of Chhattisgarh

  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • खेल
  • राजनीति
  • अपराध
  • स्वास्थ्य
  • टेक्नोलॉजी
Watch Videos
  • Home
  • सर्व समाज समुदाय को खुद के समाज को समझ नहीं पा रहे हैं दूसरों के संगठनों में भीड़ बनने का काम करते आ रहे हैं: संजय पंत
  • Latest
  • छत्तीसगढ़

सर्व समाज समुदाय को खुद के समाज को समझ नहीं पा रहे हैं दूसरों के संगठनों में भीड़ बनने का काम करते आ रहे हैं: संजय पंत

Purushottam Manhare April 15, 2022

किरंदुल ।सामाजिक कार्यकर्ता संजय पंत ने  प्रेस नोट जारी कर कहा कि आदिकाल से निवासरत करने वाले सर्व मूल निवासी समुदाय के लोग दूसरों के संगठनों में जुड़कर बाहरी संगठनों के लिए खुद के समाज का भीड़ जुटाने का काम कई सालों से करते आ रहे हैं और औरों के संगठनों को ताकतवर मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं और खुद के समाज को गुमराह करते हुए धोखा दे रहे हैंऔर बहुत बड़ा भूल कर रहे है। इतना ही नहीं मूल समाज के हर समुदाय के लोग बहुत सारे बाहरी संगठनों में शामिल होकर बैठ गए हैं,खुद के समाज व समुदाय को समझ नहीं पा रहे हैं ना समझा पा रहे हैं।पांचवी अनुसूची क्षेत्र में बहुत सारे बाहरी संगठनों का धीरे धीरे फैलाव व प्रचार प्रसार हो रहा है,और हमारे मूल समाज के लोग ही उन संगठनों में भाग लेकर जुड़ रहे हैं कार्यकर्ता पदाधिकारी बन रहे हैं।और खुद समाज के जल जमीन जंगल खुद के हक अधिकार को खोते जा रहे हैं, बाहरी संगठनों में जुड़ने के चक्कर में खुद अपने समाज समुदाय के रीति-रिवाजों से दूर होते जा रहे हैं।मूल समुदाय के लोगों के  आने वाले पीढ़ियों के लिए यह  बहुत बड़ा नुकसान साबित होने वाला है,अगर वक्त रहते समाज समुदाय के लोगों को सही गलत का  अवगत कराते हुए समझाइश व सुधार नहीं किया गया तो। मूल समाज के लोगों को  आने वाले पीढ़ियों के लिए मजबूरी जिंदगी मुसीबत व भटकाव गुलाम जिंदगी जीने को छोड़कर जाने के सिवाय।समाज से ऊपर कोई संगठन है ना राजनीति पार्टी सभी संगठन व राजनीति पार्टी समाज से ही पैदा हुए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय पंत ने यह भी कहा कि समाज से ऊपर कोई संगठन है ना कोई राजनीति पार्टियां है। समाज सभी राजनीतिक पार्टियों का व सभी संगठनों का मालिक है।समाज से ही संगठन बनाई गई है समाज सेही राजनीति पार्टियां बनाए गए हैं। इसलिए सर्व समाज को किसी भी संगठनो के बैनर तने जाने की अवश्कता ही नहीं है।हर संगठनों के लोगों को समाज के बैनर तले शामिल होकर अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने की और सर्व समाज हित में निस्वार्थ भाव से काम करते हुए समाजों के संवैधानिक मुल हक अधिकारों को सुरक्षित रक्षित करने व बचाने की आवश्यकता है।दूसरों के बाहरी संगठनों में भीड़ बनना दूसरों के संगठनों को ताकतवार बनवाने का काम करनाउनके पीछे चलना नहीं छोड़गें तब तक खुद के मूल समाज कभी मजबूत नहीं हो पाएगा और सर्व मूल समाज के जल जंगल जमीन व मूल संवैधानिक हक अधिकार को नहीं बचा पाएंगे।मूल समाज समुदाय के लोगों में इतना ताकत है। की किसी राजनीति पार्टीयों में है।ना कोई और संगठनों में है समाज सबसे बड़ा उच्च अदालत है। समाज को किसी के पीछे जाने की आवश्यकता नहीं है। समाज के पास हाथ जोड़कर सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता और संगठनों के लोगों को
आना पड़ता है और हर 5 साल में हाथ जोड़कर समाज के पास आते देखागया है और आने वाले समय में भी देखा जा सकता है। इसीलिए समाज सबसे ऊपर है समाज से ऊपर कोई संगठन नहीं है। ना राजनीति पार्टीयों के कार्य करता व नेता हैं। बशर्ते सर्व समाज को निस्वार्थ भाव से संगठित होना है और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना है। और अपने मूल समाज के जल जंगल जमीन व खनिजों के ऊपर मूल हक अधिकारों के ऊपर बड़े-बड़े पूंजीवादी धनाढ्य लोग गिद्ध की तरह नजर लगाएं बैठे हैं उन लुटेरों से कैसे बचाया जाएं और बचाना है इस पर गहन चिंतन मनन करने की जरूरत है ना कि किसी संगठन के बैनर तले जाके काम करने की।

समाज ने जिनको सब कुछ दिया है वही लोग समाज को धोखा देने में लगे हैं और समाज के साथ सौतेले व्यवहार कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय पंत ने यह भी कहा कि सर्व मुल समाज ने जिन लोगों को भरपूर मान सम्मान दिया है सोहरत दौलत व आलीशान जिंदगी दिया है। वही लोग आज खुद के समाज को समझ नहीं पा रहे हैं धोखा देने में लगे हैं।खुद के समाज के जल जंगल जमीनों को खनिजों को अपने खुद के समाज के हक अधिकारों को पूंजीपतियों के हवाले करने में दिन रात लगे हुए हैं। खुद के अपने समाज को हक अधिकार व न्याय नहीं मिल पा रहा है ना दिलवा पा रहे हैं दर-दर के ठोकरे खाने पड़ रहे हैं।अपने खुद के समाज के नौजवान युवा युवतीयों को पढ़ लिख कर बेरोजगार होकर घरों में बैठे रहना पढ़ रहा हो। किसी तरह माता पिता ने अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया पर नौकरी रोजगार नहीं मिल पाने के कारण मजबूरन इधर उधर भटकना पढ़ रहा हों। जिस क्षेत्र में जिस जिले में बड़े-बड़े बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थापित हो उसी क्षेत्र के पढ़े-लिखे नौजवानों को नौकरी पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पढ़ रहे हों भटकने पढ़ रहे हों अच्छे पढ़ लिख कर भी व्यापारि लोगों के दुकानों में मजबूरन काम करना पड़ रहे हो बड़े छोटे होटलों व दुकानों में सुबह से लेकर शाम तक युवा युवती को काम करने पढ़ रहे हो।व्यापारी व सेठों के पास ड्राइविंग कर जिंदगी जीने में मजबूर होने पड़ रहे हैं तो सोचने में मजबूर करता है कि मूल समाज से जिन भी लोग बड़े बड़े संगठनों में जुड़े हैं।राष्ट्रीय राजनीति पार्टियों में बड़े-बड़े कार्यकर्ता नेता बने हैं।और सर्व मुल समाज के जनता ने भरोसा विश्वास कर अपने कीमती वोट देकर जितवा कर संविधानिक पदों पर बिठाया है विराजमान किया है। वही आदरणीय सज्जन लोग क्या खुद के समाज को भूल गए खुद के समाज के बेटा बेटीयों व पढ़े लिखे नौजवानों को युवा व युवतीयों को भूल गए क्या यही दिन देखने के लिए जनता ने अपने कीमती वोट देकर बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर विराजमान करवाते आ रहे है और करवा रहे है। तो भी खुद के समाज को लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं आखिर किसके दबाव में है।क्या कारण है अपने खुद के समाज के जल जमीन जंगल व खनिजों को अपने खुद के समाज के मुल अधिकारों को बचा नहीं पा रहे हैं। अपने खुद के मूल समाज के लोग अपने हक अधिकार को बचाने के लिए जगह जगह में रैली धरना प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। दर-दर की ठोकरें खाने पड़ रहे हैं भटकने पढ़ रहे हैं।

About Author

Purushottam Manhare

See author's posts

Tags: news

Post navigation

Previous कोविड काल मे उत्कर्ष सेवा करने वालों को नागरिक सुरक्षा सेवा सम्मान से किया गया सम्मानित
Next सुखविंदर सिंह की गाई श्री हनुमान चालीसा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या में  ,टाइम ऑडियो और सिंगर सुखविंदर सिंह का राम भक्तों के लिए अनमोल तोहफा

Related Stories

प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*
  • Latest
  • Newsbeat
  • छत्तीसगढ़

प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*

September 6, 2026
जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले
  • Latest
  • छत्तीसगढ़

जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले

September 6, 2026
श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
  • Latest
  • Newsbeat
  • छत्तीसगढ़

श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

September 6, 2026

Recent Posts

  • प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*
  • जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले
  • श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
  • शिक्षक दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न
  • गुढ़ियारी में भक्ति, उत्साह और संस्कृति का भव्य संगम, बसंत अग्रवाल के संयोजन में विशाल दही हांडी उत्सव संपन्न

You may have missed

प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*
  • Latest
  • Newsbeat
  • छत्तीसगढ़

प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*

September 6, 2026
जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले
  • Latest
  • छत्तीसगढ़

जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले

September 6, 2026
श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
  • Latest
  • Newsbeat
  • छत्तीसगढ़

श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

September 6, 2026
शिक्षक दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न
  • Latest
  • छत्तीसगढ़

शिक्षक दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न

September 6, 2026

Recent Posts

  • प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से बढ़ेगा व्यापाररू युवा कैट बिजनेस मीट में बनी नई दिशा*
  • जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है :नाना भाऊ पटोले
  • श्री श्री पशुपतिनाथ मंदिर में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
  • शिक्षक दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न
  • गुढ़ियारी में भक्ति, उत्साह और संस्कृति का भव्य संगम, बसंत अग्रवाल के संयोजन में विशाल दही हांडी उत्सव संपन्न
  • Home
  • Contact
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | DarkNews by AF themes.