बंधन मे रहकर भी जीव भगवान की भक्ति कर सकता है…आचार्य दीक्षित..
भगवान ने हमें मानव शरीर दिया है और मानव शरीर कितना सुंदर दिया है दो पैर, दो हाथ, दो कान, दो आंख दिए भगवान की भक्ति के लिए। बताइए भगवान यदि इनमें से कुछ कम कर देते तो क्या कर लेते इसलिए ऊपर वाले ने हमें सुंदर शरीर दिया है तो समय निकालकर भगवान की भक्ति जरूर करनी चाहिए। मारुति मंगलम में आयोजित संगीत में श्रीमद् भगवत कथा के दौरान मथुरा से पहुंचे आचार्य विष्णु प्रसाद दीक्षित ने तो कथा का रसपान कराया।। श्रीमद् भागवत कथा के सागर में भक्तों ने खूब गोते लगाए ।।
गुढ़ियारी स्थित मारुति मंगलम में श्रीमद् भागवत प्रचार कथा समिति और हनुमान मंदिर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संगीत में भागवत कथा में भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य श्री ने भागवत कथा में आगे बताया कि भगवान ने हमें तन ढकने के लिए कपड़ा और मन ढकने के लिए सुंदर भगवान की भक्ति करने यह अवसर प्रदान किया है इसलिए हमें भगवान की भक्ति में डूबे रहना चाहिए।। भगवान की भक्ति के लिए हमें समय निकालना चाहिए क्योंकि भगवान की भक्ति टेबल मनुष्य ही कर सकता है ।। वैसे तो जीव 84 लाख है। अपने अपने योनियो में पैदा होते है जीव जंतु भगवान की सेवा पूजा अर्चना और आराधना नहीं कर सकते उसका अधिकार मनुष्य को दिया गया है, लेकिन मनुष्य संसार के मोह माया में ही भटकते रहता है।।
भगवान के भक्तों को सताना नहीं चाहिए…






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श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मथुरा से पधारे आचार्य श्री विष्णु प्रसाद दीक्षित ने आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ कथा सुनने पहुंचे भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए आगे बताया कि भरत नाम के राजा जो बाद में जड़ भरत के नाम से प्रसिद्ध हुए जब उस राजा ने भगवान की भक्ति मैं अपने आप को लीन किया तब उस राजा की बलि देने के लिए असुरों ने एक गुफा में चले गए और इनकी बड़ी देने लगे तभी स्वयं माताजी प्रगट हो गई और अपने भक्त के बलि लेने वाले का संहार कर दिया इस तरह अपने भक्तों की रक्षा भगवान ने की है जो भक्त भगवान की भक्ति में रहते हैं उनकी रक्षा विष्णु भगवान करते हैं इसलिए हमें भगवान की भक्ति के लिए कुछ समय जरुर निकालना चाहिए।।
भागवत कथा में में सुनाया भक्त प्रहलाद के चरित्र का वर्णन… भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य श्री ने आगे बताया कि यदि भक्त सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है तू कितनी भी विपरीत परिस्थिति आ जाए भगवान भक्तों का साथ नहीं छोड़ता बल्कि विपरीत परिस्थिति में भगवान भक्तों का सहारा बनता है प्रहलाद की भक्ति को देखते हुए उनके पिता राक्षस हिरण्यकश्यप ने कितने भयानक से भयानक राक्षसों को अपने पुत्र को मारने के लिए भेजा अपने पुत्र को कई यातनाएं भी दी गई उसके बाद भी भगवान की भक्ति में लीन प्रहलाद की रक्षा स्वयं भगवान ने किया है इसलिए प्राणी को कठिन से कठिन और सुखी परिस्थिति में भी भगवान की भक्ति करते रहना चाहिए।।
कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर होगा भगवान राम और कृष्ण का जन्म….
भागवत आचार्य आचार्य श्री ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को भगवान राम और कृष्ण का जन्म होगा और हम सभी मिलकर भगवान राम और कृष्ण के जन्मोत्सव को बड़े धूमधाम से मनाएंगे क्योंकि जन्माष्टमी का पावन पर्व है वैसे तो सभी जगह भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया जाएगा उसी कड़ी में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन भगवान कृष्ण का जन्म होगा ।। मारुति मंगलम में भी भगवान कृष्ण कन्हैया लाल के जन्म को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान कृष्ण कन्हैया लाल के जन्मोत्सव में भारी संख्या में भक्त उपस्थित हो ऐसा अनुरोध समिति के पदाधिकारियों ने किया है।।
