*डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर*
*हृदय की विफलता पर एसीआई के रिसर्च का प्रकाशन यूरोपियन हार्ट जर्नल में*
*आईसीएमआर के सहयोग से भारत की सबसे बड़ी हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री 10 अगस्त को प्रकाशित*
*रायपुर 2022.* पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय से संबंधित एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआई) के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा हृदय की विफलता यानी कार्डियक फेल्योर पर किये गए रिसर्च को सबसे बड़ी चिकित्सा शोध पत्र यूरोपियन जर्नल ने प्रकाशित किया है। इस शोध पत्र में भारत भर के कुल 10,851 दिल के मरीजों में हृदय की विफलता (हार्ट फेल्योर) के क्लीनिकल प्रोफ़ाइल को आधार बना कर 90 दिनों तक रिसर्च किया गया।
एसीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित यह रिसर्च भारत की सबसे बड़ी हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री है जो 10 अगस्त 2022 को यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है। शोध कार्य के अंतर्गत देश के सभी प्रमुख कार्डियोलॉजी संस्थान को नोडल केंद्र बनाया गया था जिसमें पूरे भारत के 21 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों से 10,851 हृदय के मरीजों के चिकित्सीय विवरण को शामिल किया गया। इस शोध में सम्मिलित देश के बाकी सभी हॉस्पिटल ने अपने अध्ययन में केवल 100 मरीजों को शामिल किया, मात्र एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट मेडिकल कॉलेज रायपुर ने 200 मरीजों पर अध्ययन कर अग्रणी भूमिका निभाई।






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डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार नेशनल हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री (राष्ट्रीय हृदय विफलता रजिस्ट्री) आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च)द्वारा वित्त पोषित भारत की सबसे बड़ी हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री है जो हाल ही में यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है। यह उपलब्धि केवल एसीआई के लिए ही नहीं अपितु पूरे चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए गौरव का विषय है।
*90 दिनों में हर सात हृदय रोगियों में से एक की मृत्यु हो जाती है*
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने शोध के निष्कर्ष की जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री (एनएचएफआर) द्वारा किये गए इस शोध के अनुसार 90 दिनों में हर 7 हृदय रोगियों में से एक की मृत्यु हो जाती है।
इस अध्ययन में पाया गया है कि 90-दिन की मृत्यु दर निम्न शैक्षिक स्थिति वाले व्यक्तियों में सबसे अधिक है।
कोरोनरी धमनी रोग या इस्केमिक हृदय रोग, 72 प्रतिशत लोगों में हृदय की विफलता का प्रमुख कारण है वहीं 18 प्रतिशत लोगों में कार्डियोमायोपैथी हार्ट की विफलता का कारण है।
डेटा से पता चलता है कि दिशा-निर्देशित चिकित्सा उपचार (जीडीएमटी) हृदय की विफलता के रोगियों के हालत में सुधार करते हैं जबकि केवल 47.5% रोगियों को ही यह देखभाल प्राप्त होती है। रजिस्ट्री में शामिल हार्ट फेल्योर वाले 7 रोगियों में से एक रोगी कि मृत्यु फॉलो-अप के शुरुआत 90 दिनों में ही हो गई। जबकि दिल की विफलता अमीर और गरीब दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है, एनएचएफआर के आंकड़ों में जो चौंकाने वाला है वह शैक्षिक स्तर और मृत्यु दर के बीच स्पष्ट संबंध है, जिसमें 90-दिन की मृत्यु दर निम्न शैक्षिक स्थिति वाले व्यक्तियों में सबसे अधिक है।
50 % से भी कम मरीजों को हार्ट फेल्योर गाइड लाइन के अनुसार इलाज किया जाता है, जबकि हार्ट फेल्योर गाइड लाइन के अनुसार इलाज करने से सीरियस हार्ट फेल्योर के मरीजों की जान बचाई गई है – यह शोध से प्रमाणित हुआ है।
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