अंबिकापुर। नारायणी परिसर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन के सुअवसर पर कथा के माध्यम से बताया कि हम सबके हृदय में भगवान का वास है जो श्रीहरि हमें पाप, पाखंड, रजोगुण, तमोगुण से हमेशा दूर रखते हैं। और हमें अपने चरणों की सेवा के करीब रखते हैं । साथ ही बताया कि भगवान का उन्हीं लोगों के हृदय में वास होता है, जो सत्कर्म करते हैं। अनैतिक कमाई का लाभ तो कोई भी उठा सकता है। परन्तु हमें हमारे अनैतिक कर्मों को हमें ही भोगना होगा। इसलिए कर्म करनें में सावधानी बरतें।

तीसरे दिन कथा में ये रहा खास
कथा में तीसरे दिन महाभारत की पावन कथा के माध्यम से बताया कि अगर विस्वास द्रोपदी जैसा हो तो भगवान आज भी अपने भक्त के लिए दौड़े आते हैं। साथ ही शिव विवाह, ध्रुव चरित्र, बामन अवतार आदि की कथा का संगीतमय चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह कश्यप ऋषि व अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेकर किस तरह श्रीनारायण ने राजा बलि से भिक्षा में तीन पग जमीन मांगी। और ढाई पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया। शिव व सति प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि किस तरह शिव (पति की) आलोचना सुनने पर सति माता ने अपना शरीर यज्ञ कुण्ड में भस्म कर दिया। जब शिवजी ने सति की देह को लेकर भ्रमण किया तो नारायण के चक्र से सति माता के शरीर 51 स्थानों पर गिरा, जहां शक्ति पीठों की उत्पति हुई। जीवात्मा का सच्चा सम्बंध सगे सम्बंधियों से नहीं बल्कि प्रभु से होना चाहिए। वह जीवन निरर्थक है जो मनुष्य जन्म में भी प्रभु की भक्ति न करे। इस प्रकार मधुमय कथा से मन्त्रमुग्ध कर हजारों भक्तों को श्रीहरि चर्चा से जोड़ा अंत में आरती कर सभी भक्तों को पर्साद वितरण किया गया। कल नन्दोत्सव होगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री माननीय अमरजीत भगत एवं अंबिकापुर राज परिवार घराने से माननीया बेबी राज जी साथ ही उपस्थित रहें कलीराम इंदिरामनी देवी, सतनारायण मीना देवी लक्ष्मी नारायण बंसल संजय बंसल सुजीत बंसल सतीश बंसल आशीष बंसल अरविंद बंसल समस्त बंसल परिवार पावड़ा साहु वाले सभी भक्त जनों के साथ उपस्थित रहे






![]()


