रायपुर/ गुरु घासीदास के द्वितीय सुपुत्र महान प्रतापी राजा के नाम से प्रख्यात गुरु बालकदास की 221 वी. जयंती शुक्रवार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा राजश्री सद्भावना समिति के संयुक्त तत्वाधान में तेलीबांधा शताब्दी नगर स्थित “सद्भावना हाल” में जयंती कार्यक्रम आयोजित की गई जिसमें समाज के लोगों ने गुरुगद्दी व गुरुजी के छायाचित्र की विशेष पूजा अर्चना के साथ मंगल आरती कर उनके जीवन दर्शन को याद किया, इस दौरान “जय- जय सतनाम” की जैयघोष के साथ पंथी, व मंगल भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई।
आज के कार्यक्रम में गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के प्रदेश अध्यक्ष के.पी. खण्डे, राजश्री सद्भावना समिति की अध्यक्ष श्रीमती शकुन डहरिया, डॉ.जे.आर. सोनी, डी.एस. पात्रे, सुंदरलाल जोगी, चेतन चंदेल, सेवाराम कुर्रे, पं. अंजोर दास बंजारे,कृपाराम चतुर्वेदी, धर्मेंद्र घृतलहरे, श्रीमती शकुंतला डेहरे, अमरौतिन भतपहरी, अनिता भतपहरी,शशिबाला सोनकेंवरे आशा पात्रे सहित अनेको लोग उपस्थित थे ।
कार्यक्रम के दौरान दोनों समिति के अध्यक्ष द्वय ने एक स्वर में कहा कि आज समाज में भंडारी, साटीदार, महंत, राजमहंत जैसे पद सृजित है वह गुरु बालकदास जी की ही देन है जिन्होंने संगठित व सुव्यवस्थित सतनामी समाज के लिए यह व्यवस्था दी थी।






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